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लीची - लीची फल के फ़ायदे व नुकसान-लीची खाने के फायदे जानकर हैरत में पद जायेंगे
In this Article
| लीची के प्रकार |
| लीची का इतिहास |
| लीची में पाए जाने वाले पोषक तत्व |
| लीची फल के फ़ायदे |
| लीची से नुकसान |
| लीची के बीज के फायदे |
| लीची जूस व् पत्ते का फ़ायदा |
| लीची का सेवन कैसे करें |
| लीची को खाने से हुई मौत का विवाद |
लीची एक मीठा फल है यह जब पूरी तरह से नहीं पके तो स्वाद इसका खट्टा भी होता है. ये गर्मियों के मौसम के अंत में और बरसात के शुरुआती सीजन में ही पाया जाता है. इसका बोटेनिकल नाम लीची चिनेंसिस है. लीची सोपबैरी परिवार से आता है. यह जीनस का सदस्य है. लीची मूलतः चीन में ज्यादा उत्पादित किया जाता है, इसके अलावा यह भारत, दक्षिण पूर्व एशिया, साउथ अफ्रीका, वियतनाम, ब्राजील, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटेड स्टेट में भी पाया जाता है क्योंकि इन देशों का मौसम और जलवायु इसकी खेती के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त है क्योंकि वहा की जलवायु उष्णकटिबंधीय होती है. लीची को कई तरह के नामों से बुलाया जाता है हिंदी में इसे लीची, तमिल में इसे विलाज़ी पज्हम, मलयालम में इसे लीची पज्हम नाम से पुकारा जाता है. यह अपने स्वाद की वजह से पुरे विश्व में काफी पसंद किया जाता है. चीन में लीची को रोमांस का प्रतीक भी माना जाता है.
भारत में इसकी खेती बिहार के मुज़फ्फरपुर में बहुतायत में होती है. बिहार, पश्चिम बंगाल और आसाम से ज्यादा लीची का उत्पादन करता है. लीची ने लोगों की पसंद की वजह से छोटे छोटे बजारों के साथ ही पुरे विश्व के सुपर मार्केट में भी अपनी जगह बना ली है. लीची की मांग जितनी अधिक है उसका उत्पादन उतना अधिक नहीं है क्योंकि यह हर मौसम में नहीं उगाया जा सकता है. इसके लिए भाभा अटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) इस पर शोध कार्य कर रहे है ताकि विभिन्न समय में भी इसकी फ़सल उगाई जा सके.
लीची के प्रकार (Types of Lychee)
लीची के बहुत सारे प्रकार है, यह एक मोटे बीज वाला फल है. लीची का फल देखने में स्ट्रोबरी के फल जैसा दिखता है. इसके ऊपर की परत हरी होती है, और पूरी तरह से पक जाने के बाद यह हल्के लाल और गुलाबी रंगत लिए होते है. उसके अंदर मरून या भूरे रंग का एक बीज होता है, बीज के ऊपर इसके गुदे होते है जिसका सेवन किया जाता है. किसी किसी नस्ल में इसके पतले बीज भी पाए जाते है. भारत में इसे विभिन्न नामों से बुलाया जाता है जिसमे शामिल है शाही, देहरादून, बड़े और लाल लीची, कलकतिया, गुलाब जैसी सुगन्धित लीची. इनमे से सबसे ज्यादा पसंद होने वाली लीची के प्रकारों में शाही लीची सबसे ज्यादा पसंद की जाती है, क्योंकि उसके अंदर गुदे या पल्प बहुत ज्यादा पाए जाते है और लीची की अपेक्षा यह स्वादिष्ट भी ज्यादा होता है. चीन में यह सबसे अधिक विकसित है जिनके प्रकारों में शामिल है- संयुएहोंग, बैला, दज़ु, हेइए, नुओमिची, गुइवेइ, लंज्हू, चेंजि और शुइदोंग आदि.
लीची का इतिहास (Litchi history)
लीची की खेती की शुरुआत का इतिहास दक्षिण चीन में 1059 ईस्वी में मलेशिया और उत्तरी वियतमान में पाया गया है, और अनौपचारिक रूप से 2000 बी सी में इसके चाइना में पाए जाने की घोषणा हुई. चीन के सम्राट जुआंग ज़ोंग का लीची पसंदीदा फल था राजा के पास यह फल जल्दी से पहुचाने के लिए घोड़ों का इस्तेमाल होता था, क्योंकि यह सिर्फ़ दक्षिण चीन में ही उगाया जाता था. लीची को वैज्ञानिक तरीके से पिअर सोंनेरत द्वारा 1748 से 1814 में अपनी यात्रा से लौटने के बाद वर्णित किया. बाद में मेडागास्कर ने इसको प्रमुख रूप से वर्णित किया. लीची का पेड़ 30 से 40 फिट तक लम्बा हो सकता है. अब इसको उन्नत तरीके से गमलों में भी लगाया जाता है जो सजावट के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके पते लम्बे और नुकीले होते है फल लगने से पहले इसमें मंजर लगते है. फल एक साथ 8 से 10 तक संख्या में लगते है.
लीची में पाए जाने वाले पोषक तत्व (Lychee fruit nutrition facts)
| सिध्दांत | पोषक तत्व | पोषक तत्व का % RDA |
| एनर्जी | 66 किलो ग्राम कैलोरी | 3.3% |
| कार्बोहाइड्रेट | 16.53 ग्राम | 12.7 % |
| प्रोटीन | 0.83 ग्राम | 3.3% |
| कुल शामिल फैट | 0.44 ग्राम | 1.5% |
| कोलेस्ट्रोल | 0 मिली ग्राम | 2% |
| फाइबर | 1.3 ग्राम | 0% |
| फोलेतेस | 14 माइक्रो ग्राम | 3.5% |
| नियासिन | 0.603 मिली ग्राम | 3.5% |
| कोलिने | 7.1% मिली ग्राम | 1% |
| प्य्रिदोक्सिने | 0.100 मिली ग्राम | 9% |
| रिबोफ्लाविन | 0.065 मिली ग्राम | 3.5% |
| थायमिन | 0.011 मिली ग्राम | 1% |
| विटामिन सी | 71.5 मिली ग्राम | 119% |
| विटामिन इ | 0.07 मिली ग्राम | 0.5% |
| विटामिन के | 0.4 माइक्रो ग्राम | 0.3 % |
| इलेक्ट्रोलाइट्स | ||
| सोडियम | 1 मिली ग्राम | 0% |
| पोटैशियम | 171 मिली ग्राम | 3.5% |
| कैल्शियम | 5 मिली ग्राम | 0.5% |
| कॉपर | 0.148 मिली ग्राम | 16% |
| आयरन | 0.31 मिली ग्राम | 4% |
| मैग्नेशियम | 10 मिली ग्राम | 2.5% |
| मैंगनीज | 0.055 मिली ग्राम | 2.5% |
| फोस्फोरस | 31 मिली ग्राम | 4.5% |
| सेलेनियम | 0.6 | 1% |
| जिंक | 0.07 मिली ग्राम | 0.5% |
लीची फल के फ़ायदे
लीची में पानी की काफी मात्रा होती है। यह विटामिन सी, पोटेशियम और नेचुरल शुगर का भी अच्छा सोर्स है। इसका सेवन शरीर में पानी के अनुपात को संतुलित रखता है, जिससे शरीर और पेट को ठंडक मिलती है। पाचन क्रिया सही रखने के साथ ही मस्तिष्क के विकास में भी इसकी बड़ी भूमिका है। ऐसे में आइए जानते हैं
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गुणों से भरी है लीची
लीची हमेशा तरोताज़ा रहने वाले ऊँचे पेड़ों पर लगती है। घनी हरी पत्तियों के बीच गहरे लाल रंग के बड़े-बड़े गुच्छों में लटके लीची के फल देखते ही बनते हैं। पहली शताब्दी में दक्षिण चीन से प्रारंभ होने वाली लीची की खेती आज थाइलैंड, बांग्लादेश, उत्तर भारत, दक्षिण अफ्रीका, हवाई और फ्लोरिडा तक फैल चुकी है। इन प्रदेशों की जलवायु लीची के लिए उपयुक्त पाई गई है। अन्य फलों की तरह लीची भी पौष्टिक तत्वों का भंडार है। -
अच्छा होगा डाइजेशन
लीची में मौजूद विटामिन लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और पाचन-प्रक्रिया के लिए जरूरी है। इससे बीटा कैरोटीन को जिगर और दूसरे अंगों में संग्रहीत करने में मदद मिलती है। फोलेट हमारे शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखता है। इससे हमारा तंत्रिका तंत्र स्वस्थ रहता है। -
कैंसर सेल्स के विकास को रोकता है
कुछ वैज्ञानिकों ने तो लीची को ‘सुपर फल‘ का दर्जा भी दिया है। अध्ययनों से साबित हुआ है कि विटामिन सी, फ्लेवोनॉयड, क्यूरसीटीन जैसे तत्वों से भरपूर लीची में कैंसर, खासतौर पर स्तन कैंसर से लड़ने के गुण पाए जाते हैं। इसके नियमित सेवन से हमारे शरीर में कैंसर के सेल्स ज्यादा बढ़ नहीं पाते। -
इम्यूनिटी बढ़ाती है
लीची एक अच्छा ऐंटीऑक्सिडेंट भी है। इसमें मौजूद विटामिन सी हमारे शरीर में रक्त कोशिकाओं के निर्माण और लोहे के अवशोषण में भी मदद करता है, जो एक प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाए रखने के लिए जरूरी है। रक्त कोशिकाओं के निर्माण और पाचन-प्रक्रिया में सहायक लीची में बीटा कैरोटीन, राइबोफ्लेबिन, नियासिन और फोलेट काफी मात्रा में पाया जाता है। -
कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करती है
यह विटामिन लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और पाचन-प्रक्रिया के लिए जरूरी है। इससे बीटा कैरोटीन को जिगर और दूसरे अंगों में संग्रहीत करने में मदद मिलती है। फोलेट हमारे शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखता है। इससे हमारा तंत्रिका तंत्र स्वस्थ रहता है। -
वजन कम करने में सहायक
लीची हमारी सेहत के साथ ही फिगर का भी ध्यान रखती है। इसमें घुलनशील फाइबर बड़ी मात्रा में होते हैं, जो मोटापा कम करने का अच्छा उपाय है। फाइबर हमारे भोजन को पचाने में सहायक होता है और अंदरूनी समस्याओं को रोकने में मदद करता है। -
पेट के लिए फायदेमंद
हल्के दस्त, उल्टी, पेट की खराबी, पेट के अल्सर और आंतरिक सूजन से उबरने में लीची का सेवन फायदेमंद है। यह कब्ज या पेट में हानिकारक टॉक्सिन के प्रभाव को कम करती है। गुर्दे की पथरी से होने वाले पेट दर्द से आराम पहुंचाती है। -
ऊर्जा का प्रमुख स्त्रोत
लीची ऊर्जा का स्त्रोत है। थकान और कमजोरी महसूस करने वालों के लिए लीची बहुत फायदेमंद है। इसमें मौजूद नियासिन हमारे शरीर में ऊर्जा के लिए आवश्यक स्टेरॉयड हार्मोन और हीमोग्लोबिन का निर्माण करता है, इसलिए काम की थकावट के बावजूद लीची खाने से आप दोबारा ऊर्जावान हो जाते हैं। -
पानी की कमी नहीं होने देती
लीची का रस एक पौष्टिक तरल है। यह गर्मी के मौसम से संबंधित समस्याओं को दूर करता है और शरीर को ठंडक पहुंचाता है। लीची हमारे शरीर में संतुलित अनुपात में पानी की आपूर्ति करती है और निर्जलीकरण से बचाती है। पेट और अन्य बीमारियों की रोकथाम में असरदार लीची शरीर की अम्लता के उच्च स्तर को कम करके पाचन संबंधी विकारों को दूर करती है। -
सर्दी-जुकाम से बचाव
लीची विटामिन सी का बहुत अच्छा स्रोत होने के कारण खांसी-जुकाम, बुखार और गले के संक्रमण को फैलने से रोकती है। -
पेट के लिए फायदेमंद
गैस्ट्रो आंत्र विकार, हल्के दस्त, उल्टी, पेट की खराबी, पेट के अल्सर और आंतरिक सूजन से उबरने में लीची का सेवन फायदेमंद है। यह कब्ज या पेट में हानिकारक टोक्सिन के प्रभाव को कम करती है। गुर्दे की पथरी से होने वाले पेट दर्द से आराम पहुंचाती है। मधुमेह के रोगियों के तंत्रिका तंत्र को होने वाली क्षति को रोकने में मदद करती है। -
रक्तचाप और दिल की बीमारी से बचाए
लीची में मौजूद पोटेशियम दिल की बीमारियों से बचाव करता है। यह हृदय की धड़कन की अनियमितता अथवा अस्थिरता और रक्तचाप को नियंत्रित रखता है। लीची में मौजूद लाभदायक रासायनिक तत्व शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करते हैं, जिससे शरीर में खून की कमी नहीं हो पाती और रक्त का प्रवाह सही ढंग से होता रहता है। -
बच्चों के विकास में सहायक
लीची में पाए जाने वाले कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम बच्चों के शारीरिक गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये मिनरल्स हड्डियों में विकार आने वाली बीमारी ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने में मदद करते हैं। -
सूजन की दर्द से राहत
लीची तंत्रिका तंत्र की नसों और जननांगों की सूजन के इलाज में फायदेमंद है। इससे दर्द से राहत मिलती है। किसी भी अंग में सूजन कम करने के लिए लीची बीज के पाउडर का लेप लगाने से आराम मिलता है। -
लीची त्वचा के लिए लाभदायक
लीची में विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, विटामिन ए और विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है जिसकी वजह से ये त्वचा के लिए विशेष तरह से लाभदायक है. यह त्वचा को चमकदार और दाग़ धब्बों रहित बनाने में मदद करता है. इसके अलावा इसके त्वचा के लिए फायदे और भी हैं
- उम्र के बढ़ते असर को रोके : असमय त्वचा पर अगर झुरिया पड़ रही हो तो लीची का उपयोग इसको रोकने में सहायक हो सकता है. इसके लिए आप घर पर ही इसका फेस पैक बना सकते है. इसके लिए 4 से 5 लीची के पल्प निकाल कर और एक केले का छोटा सा टुकड़ा दोनों को मिक्स कर अच्छे से मसल ले और अपने त्वचा के ऊपर लगा कर उसको गोल घुमाते हुए मसाज करे और फिर 15 मिनट बाद इसे सादे पानी से धो दे. लीची में बहुत सारे एंटीओक्सिडेंट पाए जाते है जो ख़राब त्वचा की परत को हटाकर नई त्वचा का विकास करते है जिससे त्वचा में नई जान आ जाती है.
- चेहरे पर पड़ी झाइयो को हटाये : किसी भी सुंदर चेहरे पर अगर दाग़ दिखने लगे तो यह दिखने में अच्छे नहीं लगते है. इसलिए इससे बचने के लिए लीची के जूस का इस्तेमाल किया जा सकता है. 4 से 5 लीची का बीज निकाल कर उसका रस निकाल ले और रुई की सहायता से इसे झाइयों और दाग़ वाले स्थान पर लगाये, फिर 15 मिनट तक लगा कर रखने के बाद इसे धो दे. ये करने से जल्द ही चेहरे के दाग़ के हटने में राहत मिलेगी.
- धूप से बचाय : धूप की वजह से जो चेहरे पर कालापन आ जाता है उन्हें लीची के जूस को लगा कर दूर किया जा सकता है. इसके लिए लीची के जूस में विटामिन इ के कैप्सूल को काट कर उसके लिक्विड को मिला कर इसे कालेपन वाले जगह पर लगाये और फिर 30 मिनट बाद ठंढे पानी से धो दे. लीची धूप से जली या काली पड़ी हुई त्वचा के लिये इसलिए लाभदायक है क्योंकि इसमें विटामिन सी पाया जाता है और उसमे विटामिन इ के कैप्सूल को मिलाकर लगाने से त्वचा में नई जान आ जाती है.
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लीची बालों के लिए लाभदायक
लीची बालों के लिए भी लाभकारी है. लीची को खाने के साथ ही अगर बालों में भी लगया जाए तो यह बहुत लाभदायक होगा. बालों को झड़ने से रोकने में सहायक : प्रदुषण की वजह से और ज्यादा चिंता करने की वजह से हमारे बाल झड़ने लगतें है. लीची का इस्तेमाल कर हम इस समस्या से बच सकते है. इसके लिए 7 से 8 लीची का जूस और 2 चम्मच एलोवेरा जेल को एक कटोरे में अच्छे से मिलाकर इसको बालों की जड़ों पर हल्के हाथों से मसाज करे, फिर 1 घंटे बाद इसे माइल्ड शैम्पू से धो कर सुखा ले. इस पैक को लगाने से लाभ ये होगा कि जो बाल ज्यादा कड़े और बेजान से दिखते है वो मुलायम और नरम दिखने लगेंगे, क्योकि लीची में फ़ोलिक एसिड की मात्रा रहती है जो बालों को नरम करती है. जिस वजह से बेजान बाल भी चमकदार बन जाते है.
लीची एक बेहद स्वादिष्ट एवं लाभकारी फल है. गर्मियों में इसका सेवन कर आप अपने शरीर को कई तरह से लाभ पंहुचा सकते है, परन्तु इसका सेवन सीमित मात्रा में ही लाभकारी है. एक स्वस्थ व्यक्ति को एक दिन में 10 से अधिक लीची का सेवन नहीं करना चाहिए. किसी भी चीज़ की अति नुकसानदायक ही होती है. लीची गुणों से भरपूर है परन्तु इसके अधिक सेवन से सिरदर्द एवं नकसीर की समस्या हो सकती है. लीची में शुगर की मात्रा बहुत अधिक होती है, इसलिए मधुमेह से पीड़ित लोगो को इसका सेवन नहीं करना चाहिए.
- लीची के ज्यादा सेवन से सिर दर्द, सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्यां हो सकती है.
- लीची को मौसम के शुरुआत में खाना चाहिए नहीं तो ज्यादा समय बीत जाने पर इसमें कीड़े लग जाते है जो लाभ के बदले नुकसान पंहुचा सकते है
- लीची को खाली पेट खाने से भी यह नुकसान पंहुचा सकता है.
लीची के बीज के भी कई फायदे है इसलिए लीची खाने के बाद बीज फेंकने की बजाय सम्भाल कर रखें. अगर आपके शरीर में कही भी सूजन है तो लीची के बीज को पीस कर उसका लेप लगाने से सूजन एवं दर्द दोनों में राहत मिलती है. लीची के बीज का पाउडर चाय में मिला कर पीने से पाचन सम्बन्धी विकार दूर होते है. लीची के पेड़ की जड़ चेचक रोग के लिए अत्यंत लाभकारी है.
- लीची को कुछ लोग सुखा कर भी इस्तेमाल करते है. इसके बीजों को सुखे हुये फल की सूची में रखा जाता है.
- इसके बीज का इस्तेमाल दवा को बनाने में भी किया जाता है. लीची के बीज को खाने से लाभ के साथ नुकसान भी है. हीलियम वेबसाइट ने यह कहा है कि खाने में इसका स्वाद खराब लगने के साथ ही यह पाचन क्रिया को भी प्रभावित कर देता है.
- लीची के बीज में बहुत सारे मिनरल्स, विटामिन पाए जाते है, जो शरीर को लाभ पहुँचाने के लिए सहायक है.
- लीची का जूस गर्मियों से बचने में बहुत राहत देता है, इसके ताजे गुदों से रस या जूस निकाल कर पीया जाता है.
- आजकल जूस बाजारों में पैक होकर भी आने लगे है. जो कभी भी किसी भी समय आसानी से मिल सकते है. लीची का जूस हम घर पर भी आसानी से बना सकते है.लीची का जूस पीने से प्यास कम लगती है. कभी भी जूस को खाली पेट न पीये.
- लीची को सुखा कर भी प्रयोग किया जाता है. सुखी हुई लीची में कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है.
लीची को कई तरीकों से खा सकते है. इसको सालाद के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते है. इसके छिलके को हटाकर और जो बीज होता है उसको निकाल कर उसके गुदे को ऐसे भी खा सकते है. इसका विभन्न तरह से शरबत के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. लीची को ताजे रूप में खाना अधिक सेहतमंद होता है. लीची को जैम, जेली और सेक बना के भी खाया जा सकता है
लीची को खाने से हुई मौत का विवाद
लीची के सेवन को लेकर बिहार में हुई मौत चर्चा का विषय बन चूका था, क्योंकि अचानक से बिहार में बच्चों को एक रहस्यमई बीमारी होने लगी थी. जिसमे अचानक से चक्कर आने लगता था और वो बेहोश होकर गिर पड़ते थे जिनमे से कुछ की मौत भी हो जाती थी.
इस बीमारी के ऊपर 2013 में यू. एस. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC), अमेरिका और दिल्ली नेशनल सेन्टर फॉर डिजेज कण्ट्रोल (NCDC) और भारत के वैज्ञानिकों ने शोध किया, कि आखिर इसकी वजह क्या है. उस शोध में उन्होंने पाया कि अगर बच्चे सुबह में लीची को खाने के बाद दोपहर का खाना नहीं खा रहे है, तो उनके शरीर में ग्लूकोज की मात्रा कम हो जाती है. इसका मुख्य कारण लीची में मौजूद हेपोग्लिसिन ए और MCPG नामक रसायन का होना है जो प्राकृतिक रूप से ही लीची में पाया जाता है. जिसकी वजह से ग्लूकोज की मात्रा शरीर में बननी कम हो जाती है जिसके चलते बच्चे बेहोश हो जाते है और उनमे से कुछ की मृत्यु भी हो जाती है.
लीची को खाने से होने वाली मौत को राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र (NRCL) ने विज्ञान पत्रिका में छपी खबर लैंसेट ग्लोबल शोध के नतीजो को मानने से इंकार कर दिया है. उनका मानना है कि किसी भी तरह का फल हमें नुकसान नहीं पहुंचता है बस खाते वक्त इसकी मात्रा का ध्यान रखना चाहिए. इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च की तरफ से भी यही कहा गया है कि समस्या फलों को खाने से नहीं हो रही, बल्कि इसकी सेवन की मात्रा से हो रही है.
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बादाम (Almond) बादाम के फायदे और नुकसान Benefits and Side effects of Almond
In this article
| बादाम के फायदे - Badam ke fayde in hindi |
| भीगे हुए बादाम के फ़ायदे |
| हरे बादाम या कच्चे बादाम के फ़ायदे |
| बादाम से कुछ नुकसान - Almond side effects |
बादाम पोस्टिक तत्वो का घर माना जाता है,इसलिए हर लोग पसंद करते है। बादाम स्वाद और गुणो से भरपुर एक ऐसी खाध-पधार्थ है जिसे लोग मेवा(nuts) भी कहते है। बादाम को अँग्रेजी मे Almond भी कहा जाता है। आयुर्वेद मे इसको बुद्धि और नसो के लिए गुणकारी माना जाता है। लेकिन बादाम को अगर आप अधिक खाये तो इससे मोटापा भी बढ़ सकता है।
बादाम मे 160 कैलोरी होता है। ये कारबोहयदरत,प्रोटीन,फ़ाइबर,हेलथीफट्स,पोटोसिउम,विटामिन-ई,बी,आइरन मैग्नीशियम,कैल्सियम,फास्फोरस,ओमेगा-३ से भरपूर माना जाता है जिससे हम कई प्रकार की बीमारियो से भी लड़ सकते है,जैसे मधुमेह,कोलेस्ट्रॉल कम करता है,हदई रोग,कब्ज,त्वचा एवं बालो के लिए भी बहुत गुणकारी है।
बादाम का सेवन हमे रोज करना चाहिए लेकिन पर्याप्त मात्रा मे, नहीं तो कई प्रकार का नुक्सान भी हो सकता है। बाज़ार मे बादाम कई प्रकार के उपलब्ध होते है जैसे हरे बादाम,साबुत बादाम,और गिरी भुने बादाम,बादाम का तेल आदि। बादाम में मग्निशियम, प्रोटीन व आयरन होता है| एक शोध के अनुसार पाया गया है, जो लोग रोज बादाम खाते है उनकी आयु ना खाने वालो की अपेक्षा 20% ज्यादा होती है, यानि उनके आयु अधिक होती है|
मुट्ठी बादाम में इतनी मात्रा में पोषक तत्व होते है
| फाइबर | 3.5 gm |
| प्रोटीन | 6 gm |
| फैट | 14 gm |
| विटामिन E | 37% |
| मैगनीज | 32% |
| मैग्नीशियम | 20% |
इसके अलावा इसमें कॉपर, विटामिन B2 व फास्फोरस भी होता है, मतलब एक मुट्ठी में इतने सारे फायदे आपको मिलेंगे| इसमें 161 कैलोरी, 2.5 कार्बोहाइड्रेट होता है|
बादाम के पेड़ के फल के बीज को बादाम कहते हैं। बादाम का वैज्ञानिक नाम प्रुनस डुलिस (Prunus dulcis) है। बादाम की खेती मूल रूप से मध्य पूर्व, भारत और उत्तरी अफ्रीका में ही की जाती थी। पर अब यह ईरान, सऊदी अरब, लेबनान, तुर्की, सीरिया, जॉर्डन और इज़राइल जैसे क्षेत्रों में पाए जाते हैं। बादाम का स्वाद मीठा या कड़वा हो सकता है और ये दोनों तरह के बादाम बाजारों में आसानी से उपलब्ध होते हैं।
मीठे बादाम खाए जा सकते हैं, जबकि कड़वे बादाम का इस्तेमाल तेल बनाने के लिए किया जाता है। यह तेल एक आम तेल है जिसका उपयोग भोजन को स्वादिष्ट बनाने के लिए किया जाता है। बादाम का दूध भी बनाया जाता है जो एक स्वादिष्ट पेय है और कम पौष्टिक गाय के दूध का विकल्प है।
बादाम के फायदे - Badam ke fayde in hindi
स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन बादाम का सेवन करें। बादाम में प्रोटीन, वसा, विटामिन और मिनेरल पर्याप्त मात्रा में होते हैं, इसलिए यह स्वास्थ्य के लिए तो अच्छा है ही, त्वचा के लिए भी अच्छा है। बादाम में मौजूद पोषक तत्व याद्दाश्त बढ़ाने का भी काम करते हैं।
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दिल को बनाये सेहतमंद
बादाम आपके दिल को सेहतमंद बनाये रखने का काम करता है। शोधों में यह बात सामने आयी है कि सप्ताह में पांच दिन बादाम का सेवन करने वाले लोगों में सामान्य लोगों की अपेक्षा हृदयाघात का खतरा 50 फीसदी तक कम होता है। बादाम में मौजूद विटामिन ई, एण्टीआक्सीडेंट की तरह काम करता है। यह दिल की बीमारियों को दूर रख उसे बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है -
कोलेस्ट्रोल कम करे
खून में मौजूद कोलेस्ट्रोल लेवल को बादाम खाके control किया जा सकता है| -
बादाम खाने के फायदे तेज़ दिमाग के लिए
यह बादाम की वो खुबी है जिससे बच्चा-बच्चा वाकिफ है। दिमाग के स्वास्थ्य के लिए बादाम की गुणवत्ता को देखते हुए, इसे दिमाग के लिए "सर्वोत्तम आहार" माना जाता है। इसमें समाविष्ट विटामिन ई ना केवल दिमाग की सतर्कता को बढ़ावा देता है और संज्ञानात्मक गिरावट (cognitive decline) को रोकने में मदद करता है अपितु याददाश्त को भी बरकरार रखता है। यही नहीं, बादाम ज़िंक (zinc) में भी भरपूर है जो दिमाग की कोशिकाओं (brain cells) को हानिकारक आक्रमणों से बचाता है और इसमें निहित विटामिन बी-6 दिमाग की कोशिकाओं की मरम्मत करने में सहायता करता है। फेनिलएलनिन पार्किंसंस रोग (Parkinson's disease) को रोकने में और डोपामाइन (dopamine) और एड्रेनालाईन (adrenaline) जैसे मस्तिष्क के रसायनों (brain chemicals) के उत्पादन में मदद करता है। यह रसायन ध्यान और स्मृति के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। तो रोज़ाना एक मुट्ठी बादाम खायें और अपने दिमाग की तीव्रता को बढाएं। -
बादाम के औषधीय गुण जन्म दोष पर लगाते हैं प्रतिबंध
इसका सेवन गर्भवती महिला भी कर सकती हैं। बादाम में फोलिक एसिड होता है, जो होने वाली संतान को हृष्ट-पुष्ट बनाता है एवं उसमें होने वाले विकारों या फिर जन्म दोष को होने से रोकता है। जो महिलाएं गर्भावस्था के दौरान बादाम का सेवन करती हैं उनके शिशु में एनटीडी (तंत्रिका ट्यूब दोष) की संभावना कम हो जाती है। गर्भवती महिलाओं को अपने आहार में बादाम शामिल करना चाहिए। यदि आप गर्भवती हैं, तो इसका सेवन आपके शिशु के अच्छे स्वास्थ्य के लिए अवश्य करें। -
सुधारे रक्त संचार
बादाम में पौटेशियम की मात्रा काफी अधिक होती है और साथ ही सोडियम भी काफी कम मात्रा में होता है। इससे हमारे शरीर में रक्त संचार सुचारू बना रहता है। रक्त संचार सुचारू रहने से शरीर के हर अंग में ऑक्सीजन सही प्रकार पहुंचती है और सभी अवयवों को सामान्य रूप से काम करने में मदद मिलती है। -
हड्डियां बनाये मजबूत
बादाम में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है। कैल्शियम हड्डियों के लिए जरूरी होता है। इसलिए बादाम का सेवन करने वालों को हड्डियों की बीमारी यानी ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा कम हो जाता है। इसके साथ ही कैल्शियम दांतों को भी मजबूत बनाने का काम करता है। -
कैंसर का खतरा कम करे
बादाम में फाइबर काफी अधिक मात्रा में होता है। फाइबर हमारी पाचन क्रिया को दुरुस्त बनाये रखने का काम करता है। पाचन क्रिया ठीक रहने से कोलोन कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है। -
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाये
रोजमर्रा की छोटी मोटी बीमारी जैसे सर्दी जुखाम, खांसी, viral फीवर से बचने के लिए आपको बादाम खाना शुरू करना चाइये| बादाम खाने से हमारे शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढती है जिससे ये छोटी छोटी बीमारी जल्दी हमारे शरीर पर अपना असर नहीं दिखा पाती| अगर आपको कफ हो गया है तो गर्म दूध में कुछ बूँदें बादाम के तेल की डालें और इसे पीयें, कफ़ की समस्या दूर हो जाएगी| -
बादाम के गुण कब्ज से दिलाते हैं राहत
चूँकि बादाम फाइबर से भरपूर होते हैं, ये ना केवल कब्ज़ से राहत दिलाते हैं परंतु कब्ज़ से बचाव भी करते हैं। इसका सेवन करने से कॉलन कैंसर होने की संभावना बहुत हद तक कम हो जाती है। अच्छी मात्रा में तेलीय प्रदार्थ होने की वजह से यह सीने में जलन का भी एक सक्षम उपचार है। कब्ज़ को दूर रखने के लिए आपको रोज़ बस 4-5 बादाम खाने हैं और ढेर सारा पानी पीना है। -
शक्तिवर्द्धक
बादाम में कई पोषक तत्व होते हैं। इसमें प्रोटीन, मैगनीज, कॉपर, राइबोफ्लाविन आदि मौजूद होते हैं। ये सब पोषक तत्व शरीर को भरपूर शक्ति और ऊर्जा प्रदान करते हैं। सुबह के समय बादाम के साथ दूध का सेवन करने से शरीर को पूरी शक्ति मिलती है। -
बादाम के फायदे करते हैं त्वचा को पोषित
बादाम ना केवल त्वचा को पोषित, सुन्दर, जवां व झुर्रियों से मुक्त रखता है, अपितु यह त्वचा के रंग को भी निखारता है। इसके तेल से त्वचा की मसाज करने से सनबर्न और अन्य त्वचा-सम्बंधित विकारों को भी कम किया जा सकता है। अच्छी बात तो यह है कि बादाम के तेल से मसाज करने से आपकी त्वचा तेलिये नहीं बनती और ना ही पिम्पल्स होने का खतरा होता है। -
बादाम तेल के फायदे हैं बालों के लिए
एक बादाम अनेक बालों की समस्याओं का हल है, चाहे वो बाल झड़ने की समस्या हो या रूसी की। बादाम विटामिन ई, बायोटिन, मैंगनीज, तांबा, फैटी एसिड जैसे बालों के लिए अनुकूल पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। बादाम में निहित ज़िंक नई कोशिकाओं के नवीकरण को बढ़ावा देता है, बालों को झड़ने से बचाता है और उन्हें मज़बूत व घना बनाने में योगदान देता है। इसके तेल से मालिश करने से आपके बाल सुनहरे व लंबे भी होते हैं। लैवेंडर के तेल के साथ मिलाकर सिर की मसाज करने से दोमुँहे बाल कम होते हैं, रूसी समाप्त हो जाती है और बालों का झड़ना भी बंद हो जाता है। -
बादाम लगाते हैं मधुमेह पर अंकुश
बादाम ना केवल मधुमेह को नियंत्रण में रखता है, अपितु शुगर से होने वाली समस्याओं पर भी अंकुश लगाता है। स्वस्थ वसा (fat), विटामिन, फाइबर और बादाम में कई खनिज ग्लूकोज के अवशोषण (absorption) और प्रसंस्करण (processing) को विनियमित करने में मदद करते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, बादाम जैसे नट्स पुरुषों में टाइप-2 मधुमेह को नियंत्रण करने में अत्यंत सक्षम है। अन्य अध्य्यनों के अनुसार, बादाम खाने से मधुमेह से बचाव भी किया जा सकता है। रोज़ाना एक औंस बादाम खाएं और रक्त में शुगर के स्तर को स्वस्थ बनाए रखें। -
याद्दाश्त बढ़ाये
स्मरण शक्ति को अच्छा बनाये रखने के लिए बादाम को काफी उपयोगी माना जाता है। बादाम का सेवन अल्जाइमर और अन्य मस्तिष्क संबंधी रोगों को दूर करने में मदद करता है। रोजाना सुबह पांच बादाम भिगोकर खाने से दिमाग तेज होता है। -
प्रसव बनाये आसान
बादाम में फॉलिक एसिड होता है, जो प्रसव संबंधी समस्याओं से बचाने का काम करता है। फॉलिक एसिड भ्रूण के समुचित विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसा माना जाता है कि जो महिलायें गर्भावस्था के दौरान फॉलिक एसिड का सेवन करती हैं, उनके बच्चे अपेक्षाकृत अधिक स्वस्थ होते हैं। -
कुदरती माश्चराइजर
बादाम को कुदरती माश्चरइाजर माना जाता है। यह आपके चेहरे के लिए क्लींजर का काम करता है और साथ ही उसकी चमक भी बढ़ाता है। अपने चेहरे को साफ करने के लिए आप बादाम के तेल की कुछ बूंदें इस्तेमाल कर सकते हैं। इस तेल को ऊपर की ओर मसाज करें। रोजाना ऐसा करने से आपको एक चमकदार और नाजुक त्वचा मिलेगी। यह आपकी त्वचा में जल्द अवशोषित हो जाता है और इससे रोमछिद्र भी बंद नहीं होते।
- पाचन शक्ति को बढ़ाना – भीगा हुआ बादाम आपकी पाचन प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाकर आपकी पाचन शक्ति को बढ़ाता है.
- दिमागी शक्ति को बढ़ाता है – विज्ञानिकों ने यह शोध किया है कि रोज़ाना 4 से 6 भीगे हुए बादाम की अपने आहार में जोड़ना आपके दिमाग के लिए एक टॉनिक की तरह है और साथ ही यह केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) को काफी हद तक बढ़ाता है.
- गर्भावस्था में यह वरदान की तरह है – यदि आप गर्भावस्था में है तो आपको अपने आहार में भीगे हुए बादाम जोड़ना चाहिए.यह आपके और आपके बच्चे के स्वास्थ्य दोनों के लिए बहुत लाभकारी है.
- हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी – यदि आपका कोलेस्ट्रोल लेवल नियंत्रित रहेगा तो आपका हृदय भी स्वस्थ रहेगा. यह प्रोटीन, पोटैशियम और मैग्नीशियम का बहुत अच्छा माध्यम है, जो आपके कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को स्वास्थ्य रखता है.
- कोलेस्ट्रोल को कम करता है – भीगे हुए बादाम आपके कोलेस्ट्रोल लेवल को काफी हद तक कम कर सकता है. मूल रूप से इनमें मोनोअंसेचुरेटेड फैटी एसिड से भरे होते हैं, जो आपके खून के प्रवाह से खराब कोलेस्ट्रोल को कम करता है.
- ब्लडप्रेशर के लेवल को नियंत्रित रखता है – उच्च रक्तचाप वाले लोगों के लिए यह फायदेमंद है. तीव्र उच्च रक्तचाप का भी भीगे हुए बादाम द्वारा इलाज किया जा सकता है. इसमें सोडियम की मात्रा कम वा पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है, जोकि ब्लडप्रेशर के लिए अच्छा है.
- वजन घटाता है – भीगे हुए बादाम को रोज़ाना सुबह खाली पेट खाने से यह वजन घटने में मदद करता है. यहाँ तक कि इसमें बहु कम मात्रा में रासायनिक व् कार्बनिक यौगिक होते हैं जोकि वजन घटाने में कारीगर है.
- कब्ज का ईलाज – यह कब्ज की बीमारी के लिए भी फायदेमंद है.
- मधुमेह के रोगियों के लिये फायदेमंद – भीगे हुए बादाम मधुमेह के रोगियों के लिए बहुत अच्छा है. यह शुगर लेवल को नियंत्रित रखता है और साथ ही अन्य बिमारियों से बचाता है.
त्वचा के लिए फायदेमंद
- भीगे हुए बादाम को पीस कर अपनी त्वचा पर लगाने से यह प्राकृतिक मॉइस्चराइजर की तरह उपयोग किया जा सकता है. यदि आपकी त्वचा सूखी है तो आप इसमे क्रीम को मिलकर भी उपयोग कर सकते हैं, जिससे यह आपकी त्वचा हाईड्रेड हो जाती है.
- एजिंग को इसकी सहायता से आसानी से रोका जा सकता है. इसमें पाए जाने विटामिन ई और अन्य एंटीओक्सिडेंट आपके शारीर से हानिकारक कणों को समाप्त कर सकते हैं.
- भीगी हुई बादाम को प्राकृतिक स्क्रब की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है यहाँ तक की यह पूरे शरीर के लिए फायदेमंद है. इसमें निम्बू, शहद और ढूध मिलकर अलग – अलग पेस्ट बनाकर भी लगाया जा सकता है.
- भीगी हुई बादाम सूजन के लिए कारीगर है. यह त्वचा में होने वाली खुजली या जलन से भी राहत देती है.
- यदि आप अपनी सोई हुई त्वचा या खोये हुए निखार को वापस लाना चाहते हैं, तो भीगी हुई बादाम आपके लिए बहुत फायदेमंद है. यह बेजान त्वचा में भी जान भर देता है.
बालों के लिए फायदेमंद
- यह बालों को चमकदार और घने बनाने के लिए कारीगर है. क्योकि यह सीधे आपके बालों की जड़ों में पहुंचकर बालों को मजबूत बनाता है.
- जैसा कि ज्ञात है बादाम बहुत पौष्टिक होती है, और यदि भीगी हुई बादाम का सेवन करेंगे तो यह आपके बालों को मजबूत बनाएगा. साथ ही बेजान बालों को भी नारिश करेंगा.
- बादाम को रात भर भिगो कर रखें, फिर सुबह इसे पीस कर इसमें थोड़ा सा जैतून का तेल दाल कर पेस्ट बना लेन और इसे अपने बालों पर लगाये. इसे अपनी बालों की जड़ों में लगायें यह आपके बालों को स्वस्थ व् कोमल कर देगा.
हरे बादाम या कच्चे बादाम के फ़ायदे
हरे बादाम को कच्चे बादाम भी कहा जाता है, इसमें बहुत से पोषक तत्व पाए जाते हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होने के साथ साथ त्वचा और बालों के लिए लाभकारी हैं. इसके बहुत से फ़ायदे हैं, जोकि इसप्रकार हैं
स्वास्थ्य के लिए
- हरे बादाम हमारे हृदय के लिए बहुत अच्छा होता है. इसमें (विशेष रूप से नट्स की त्वचा) में बहुत से फ्लावोनोइड या बायोफ़्लेवोनोइड होता है जोकि एक प्रकार का चयापचयों, और हमारे शरीर में एंटीओक्सिडेंट की शक्ति को बढाता है. शोधकर्ताओं की खोज से यह पता चलता है कि इससे कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम ठीक से काम करता है जिससे हार्ट अटैक आने का खतरा नहीं होता है.
- हरे बादाम में पाया जाने वाला फॉस्फोरस हमारे दांतों और हड्डियों के लिए बहुत लाभकारी है. इससे हमारे दांत और हड्डियां मजबूत बनती है, इसी समय यह हमारी कंकाल प्रणाली की दक्षता भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ती हैं.
- हरे बादाम में एंटीओक्सिडेंट बहुत अधिक होता है. यह हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलता है और हमारी प्रतिरक्षा क्षमता को बढ़ाता है. इसलिए इससे की बिमारियों और संक्रमण में रोक लगाई जा सकती है.
- बहुत कम खाद्य पदार्थों में कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन या खराब कोलेस्ट्रोल के खिलाफ लड़ने के गुण होते है जैसे हरे बादाम में, यदि आप इसका नियमित रूप से सेवन करते हैं तो यह आपके कोलेस्ट्रोल लेवल को नियंत्रित रखता है.
- खाना खाने के बाद हमारे शरीर में शुगर लेवल बढ़ जाता है जोकि हमारे शरीर के लिए अच्छा नहीं है, इसलिए हरे बादाम इससे बचने के लिए मदद करता है. यह हमारे शरीर में बढ़ी हुई शुगर की मात्रा को कंट्रोल करता है.
- इसमें फाइबर भी अधिक होता है जो हमारी पाचन क्रिया को आसान बनाता है.
- यह हमारे शरीर में पीएच लेवल को बैलेंस करता है और साथ ही इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व हमारे शरीर के तंत्रिका तंत्र को सुरक्षित रखते हैं.
त्वचा के लिए
- यह अच्छा डेटोक्साइड होने के नाते, यह हमारी आंतरिक प्रणाली को साफ़ रखता है, जिससे मुहाँसे, दाना, ब्लैकहेड्स, वाइटहेड्स आदि जैसे कई त्वचा की समस्याओं का इलाज किया जा सकता है
- इसे फेसमास्क की तरह इस्तेमाल करने से सांवली त्वचा की परेशानी से भी बचा जा सकता है.
- इसमें बहुत से एंटीओक्सिडेंट और विटामिन ई होने की वजह से यह हमारी त्वचा में प्रदूष्ण से जमा होने वाले कणिक या विषैले कणों को दूर करता है.
- इसका सेवन कर या इसे फेसमास्क की तरह लगाकर एजिंग की समस्याओं जैसे झुर्रियां, काले धब्बे, फाइन लाइन्स आदि से निजत पाया जा सकता है.
बालों के लिए
- यह न केवल बालों को टूटने से बचाता है बल्कि यह बालों की ग्रोथ को बढाता भी है. इसमें प्रोटीन, विटामिन ई, लोहा, जस्ता आदि शामिल होते है, जो बालों को लम्बा करने में आवश्यक होते हैं.
- इसमें बहुत से विटामिन, मिनरल्स और पोषक तत्व होते है जोकि गिरते हुए बालों की समस्या से बचने के लिए लाभकारी है. क्योकि यह बालों को टूटने से बचाता है और बालों को मजबूत करता है.
- यह बालों को चमकदार भी बनाता है. इससे जड़ों में रक्त का स्त्राव बहुत सुचारू रूप से चलता है जिससे यह हमारे बालों की रक्षा करता है.
बादाम से कुछ नुकसान - Almond side effects
बादाम न सिर्फ फायदेमंद होता है बल्कि इससे कुछ नुकसान भी होते हैं, जोकि इस प्रकार हैं –
- गेस्ट्रोइन्तेंस्तिनल समस्यायें – बहुत अधिक मात्रा में बादाम का सेवन करने से कब्ज की बीमारी हो सकती है. क्योकि इससे फाइबर बहुत अधिक मात्रा में आपके शरीर में प्रवेश करता है. जिससे आपकी पाचनशक्ति गडबडा जाती है. यह हमारे पेट के लिए भी हानिकारक होता है.
- अधिकमात्रा में विटामिन ई – हमे हर रोज 15 मिलीग्राम विटामिन ई की आवश्यकता होती है. बादाम की बड़ी मात्रा में उपभोग करके आवश्यक मात्रा से अधिक यानि 1000 मिलीग्राम से ऊपर तक यह पहुंच जाता है. इससे नुकसान यह है कि इससे दस्त, पेट फूलना, धुंधला दिखना, सिरदर्द, चक्कर आना और सुस्ती जैसे समस्या हो सकती है.
- दवा से इंटरेक्शन – यदि आप मैंगनीज के समृद्ध आहार पर है और आप बादाम का भी सेवन कर रहे है, तो यह दवा से इंटरैक्ट कर सकता है. इसका कारण यह है कि इसमें भी मैंगनीज पाया जाता है. और शरीर में मैंगनीज की अधिक मात्रा से जुलाब हो सकता है. यह दवाओं से इंटरैक्ट करता है.
- वजन बढ़ना – बादाम का सबसे बड़ा नुक्सान है कि इसकी अधिक मात्रा से वजन बढ़ जाता है. शरीर के लिए जरूरी होता है कि कैलोरी बहुत अधिक मात्रा में न हो. और बादाम से बहुत जल्दी कैलोरी बढ़ जाती है जिससे वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है.
- एलर्जी – यह बहुत दुर्लभ नुक्सान है. लेकिन कुछ लोगों में बादाम से एलर्जी की प्रक्रिया भी देखी गई है. जिसके लक्षण जैसे रशेस व् साँस लेने में कठिनाई आदि हो सकते है.
- शरीर में विषैले स्तर की वृद्धी – यह भी एक बड़ी समस्या में से एक है. कड़वे बादाम हाइड्रोसायनिक एसिड को शामिल करने के लिए जाने जाते है जोकि निम्न लक्षणों को दर्शाता है जैसे तंत्रिका तंत्र का धीमा होना, श्वास लेने की समस्या आदि ये घटक भी हो सकते हैं.
- बैक्टीरिया की उपस्थिति – यह दुष्प्रभाव बादाम के लिए विशिष्ट नहीं है. लेकिन नट परिवार का हिस्सा होने के कारण बादाम जीवाणु वृद्धी के लिए प्रवण है. इससे बैक्टीरिया की उपस्थिति भी हो सकती है.
तो, बादाम को अधिक मात्रा में नही खाना चाहिए, लेकिन इससे फ़ायदे भी बहुत होते है तो इसे नियमित मात्रा में खाना चाहिए, जिससे कि यह आपके शरीर के लिए नुकसानदायक न होकर फायदेमंद हो सके.
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नीम - नीम के गुण फायदे व उसके उपयोग-Neem ke gun fayde
भारत देश में नीम एक बहुत बड़ी औषधि है, जिसे कई हजारों सालों से उपयोग किया जा रहा है| आज के समय में बहुत सी अंग्रेजी दवाइयां नीम की पत्ती व उसके पेड़ से बनती है| नीम के पेड़ की हर एक चीज फायदेमंद होती है, बहुत सी बड़ी बड़ी बीमारियों का इलाज इससे किया जाता है| भारत देश में नीम का पेड़ घर में होना शुभ माना जाता है, लोग अपने घर में इसे लगाते है ताकी इसके फायदे उठा सके| भारत से नीम के पत्तों का निर्यात 34 देशों में किया जाता है|
नीम (neem) बहुत ही लाभदायक और ओषधीय गुण से भरपूर एक पेड़ है। जिसका प्रयोग प्राचीनकाल से होमियोंपैथिक और आयुर्वेदिक दवाओ को बनाने में तो किया ही जाता है साथ ही बहुत से अंग्रेज़ी और ओर्गेनिक दवायो में किया जाता है। इतना ही नहीं नीम का प्रयोग त्वचा संबंधित क्रीम,लोशन,पाउडर और फ़ेसवश में भी किया जाता है,इसलिए तो नीम को ओषधीय गुण से भरपुर माना जाता है,जिससे हम विभिन्न बीमारियो से लड़ने में सहता मीलती है जैसे की एंटीवाइरल बुखार, त्वचा रोग ,मधुमेह,चेचक, रक्तशुद्ध आदी बीमारियो में ऐंटीसेप्टिक की तरह अपना काम करता है और जल्दी आराम भी दिलाता हैं।
नीम के पेड़ का प्रत्येक भाग जैसे तना,छाल,जड़,बीज़ का तेल इत्यादि सभी भागो को आयुर्वेदिक दवाए बनाने में प्रयोग किया जाता है। नीम का स्वाद कड़वा होता है, लेकिन ये जितनी कड़वी होती है, उतनी ही फायदे मंद होती है| आइये मैं आज आपको नीम के गुण और उसके लाभ से अवगत कराती हूँ, जिसे आप आसानी से घर में उपयोग कर बहुत बीमारियों को दूर कर सकते है|
नीम के फायदे
- वजन कम करने में सहायक
अगर आप वजन कम करना चाहते है, तो रोज नीम का जूस पीना शुरू कर दीजिये| इससे शरीर में मेटापोलिस्म बढेगा जिससे खाना फैट में नहीं बदलेगा और आपका वजन कम होने लगेगा|
कैसे उपयोग करें
1 मुट्ठी नीम के फूल में 1 चम्मच शहद व 1 चम्मच नीम्बू का रस मिलाकर पीस लें, अब इसे सुबह खाली पेट पियें| - नीम के उपयोग त्वचा के लिए
नीम एक एंटीसेप्टिक है जो हमारे त्वचा के रोगो के जैसे कील,मुहासे,चकते,टेनिंग एकजीमा जैसे रोगो को रोकने के लिए उपयोगी है।
कैसे उपयोग करें
1. 1/3 कप जेतून या नारियल का तेल में एक चम्मच नीम का तेल अच्छी तरह से मिलाकर शरीर में लगाने से चमक आती है और किसी भी प्रकार की त्वचा रोग नहीं होती।
2. चेहरे या शरीर पर किसी भी प्रकार की त्वचा संबंधित बीमारी के लिए नीम की कुछ पत्तिया का पेस्ट बिना पानी डाले बना ले ,और सुबह शाम त्वचा पर १५ मिनट के लिए लगाए फिर ठंडे पानी से धो ले। इसका प्रयोग नियमित रूप से करे आराम मिलेगा। -
दवा के रूप में
नीम की पत्ती Neem ki patti लेप्रोसी , आँख की बीमारी , नकसीर , पेट के कीड़े , पाचन , भूख में कमी , त्वचा के रोग , दिल और खून की नसों की बीमारी , बुखार , डायबिटीज , मसूड़े , लिवर आदि परेशानी दूर करने में काम आती हैं।Neem की टहनी मलेरिया में , पेट या आंतों के अल्सर , स्किन डिजीज , दांत और मसूड़ों की परेशानी आदि में काम आती है। नीम की दातुन Neem ki datun का उपयोग आज भी कई लोग करते है। यह दातुन बाजार में भी मिलती है। इससे दांत में प्लाक जमना कम होता है तथा मसूड़ों में सूजन या खून आना , मुंह से बदबू आना आदि से बचाव होता है।
Neem के फूल पित्त कम करने में , कफ मिटाने में तथा पेट के कीड़े मिटाने में काम आते हैं।
नीम का फल जिसे निमोड़ि Nimodi या निम्बोड़ि Nimbodi कहते हैं बवासीर , पेट के कीड़े , नकसीर , पेशाब की तकलीफ , कफ , घाव , डायबिटीज , आँखों की परेशानी आदि में काम आता है।Neem का तेल बालों के लिए , लिवर की ताकत के लिए , खून साफ करने के लिए , तथा खून में शक्कर की मात्रा कम करने के लिए काम में लिया जाता है।
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ब्लड शुगर कंट्रोल करें
नीम में मौजूद तत्व ब्लड में मौजूद शुगर को कंट्रोल करता है| डायबटीज वालों के लिए ये रामवाण इलाज है| रोजाना नीम लेने से इंसुलीन की मात्रा शरीर में बढती है|
कैसे उपयोग करें
रोजाना नीम की पत्तियों के रस को निकालकर सुबह खाली पेट पियें| -
नीम रूसी के लिए
नीम में फंग्स और जीवाणु रोधी गुण होते है जो आपके बालो को स्वस्त रखते है। इससे आप के बालो का सूखापन एवं खुजली में भी लाभ मिलेगा।
कैसे उपयोग करें
नीम की २०-३० पत्तियों में ५०० मिली पानी डालकर उबालना है ,१०-१५ मिनट उबालने के बाद (पत्तियों का रंग पानी में उतर नहीं आता)उसे ठंडा होने दे। अब नहाते समय शैम्पू से बाल धोने के बाद नीम के इस पानी से बाल धोए।ऐसा सप्ताह में २ बार करे बालो को इससे विशेष लाभ मीलेगा। -
कैंसर ट्रीटमेंट
एक शोध के अनुसार पाया गया है कि नीम में प्रोटीन होता है, जो खून में मौजूद कैंसर के जीवाणु से लड़ता है व उन्हें मारता है| नीम का जूस रोज सुबह लेने से शरीर में मौजूद सारे विषेले तत्व निकल जाते है| नीम कैंसर की बीमारी को दूर करता है, साथ ही रोजाना इसके सेवन से हम कैंसर की बीमारी से भी बचे रह सकते है| -
नीम मसूढ़ो की लिए
मसूढ़ो की बीमारी जैसे की मसूरों का कटना ,सूजन,खून आना,नाजूक मसुरे से दातो का हिलना आजकल आम बीमारी हो गई है। नीम इसके लिए भी एक गूणकारी ओषधि है।कैसे उपयोग करें
नीम के ताजा पते का रस निकालकर या नीम का तेल को सुबह अपने दातोमे मालिश करे,२-३ मिनट तक छोड़ दे फिर दातों को गुंगुने पानी से कुला करे,मसूरों की सभी समस्याओ से आराम मिलेगा। सुबह ब्रश की जगह नरम नीम के दातून का इस्तेमाल करे नीम के पतो को पानी में उबालकर उस पानी का आप माउथवास के लिए भी उपयोग कर सकते है | -
इन्फेक्शन से रक्षा
शरीर में कई बार तरह तरह के इन्फेक्शन हो जाते है, जिसके चलते दाद खुजली होने लगती है| फंगस के कारण भी इन्फेक्शन होता है, जिससे बचने के लिए आप नीम के पेस्ट का इस्तेमाल कर सकते है| दाद खुजली में नीम का तेल बहुत अच्छा होता है| -
नीम रक्त शुद्ध करने में
नीम एक गुणकारी रक्तशोधक और विशंषक औषधि है | यह शरीर के सभी भागों में आवश्कयक तत्त्व और ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करता है | रक्त की किसी भी प्रकार की समस्या से परेशान होने पर बिलकुल चिंता की जरुरत नहीं है |
उपाय करने का तरेका
नीम की २–३ ताज़ा कोमल पत्तियों को शहद या मुनक्के के साथ सुबह ख़ाली पेट कुछ हफ्ते तक सेवन करने से रक्त शुद्ध हो जाता है और मनुष्य को शरीर ऊर्जावान हो जाता है |
सुबह चाय में एक नीम की पत्ती मिलाकर पीने से रक्त साफ़ होता है |
ज्यादा परेशानी होने पर किसी अच्छे चिकित्सक की सलाह लेकर नीम की आयुर्वेदिक गोलियों को इस्तेमाल खाना खाने के पहले कर सकते हैं -
रक्त प्रवाह बढ़ाये
नीम रक्त की धमनियों में कचरा इक्कठा नहीं होने देता, वह उसे साफ कर देता है, जिससे रक्त का प्रवाह शरीर में सही रहता है व खून भी साफ रहता है| नीम का जूस रोज पीने से शरीर में खून की मात्रा भी बढती है| -
वाइरस का संक्रमण
वाइरस के कारण होने वाले चिकन पॉक्स , स्माल पॉक्स यानि चेचक या बोदरी जैसी बीमारियों को फैलने से रोकने में नीम का उपयोग किया जाता रहा है। Neem की पत्ती को पीस कर लगाने से त्वचा पर दूसरी जगह वाइरस नहीं फैलता। यह हर्पीज़ जैसे हानिकारक वाइरस को भी मिटा सकता है। चिकन पॉक्स होने पर नीम की पत्तियां पानी में उबाल कर इस पानी से नहाना बहुत लाभदायक होता है। इससे त्वचा को आराम मिलता है और यह संक्रमण अन्य स्थान पर नहीं फैलता।
त्वचा के रोगों में Neem की पत्ती पानी में उबाल कर इस पानी से नहाने से बहुत लाभ होता है। इससे त्वचा की खुजली या जलन आदि में भी आराम मिलता है। यह पानी पीने से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं और आंतों की कार्यविधि सुधरती है। -
हृदय की देखभाल
नीम की पत्ती पानी में उबाल कर यह पानी पीने से नसों में लचीलापन आता है इससे हृदय पर दबाव कम होता है। यह हृदय की धड़कन नियमित करने में सहायक होता है और इस प्रकार उच्च रक्तचाप High Blood Pressure को कंट्रोल करता है। -
मलेरिया
नीम की पत्तियां का उपयोग मलेरिया बुखार को रोकने में कारगर पाया गया है। Neem की पत्तियां मच्छर को पनपने से रोकती हैं। -
मधुमेह
नीम में मौजूद यौगिक तत्त्व रक्त शर्करा को रोकने के लिए रामबाण इलाज हैं| मधुमेह कितना भी पुराना हो चूका हो या शुरूआती चरण में हो ,यह रोगी की इन्सुलिन आवश्यकता को पूरी तरह ख़तम कर देता है |
कैसे उपयोग करें
मधुमेह की रोकथाम के लिए प्रतिदिन सुबह ख़ाली पेट नीम की ४–५ कोमल पत्तियां चबाकर खाने से लाभ होता है |
नीम की पत्तियां छाया में सुखाकर उसका बारीक़ चूर्ण तैयार कर लें और सुबह शाम एक कप गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से कई सालों पुराना डॉयबिटीज़ भी ख़तम हो जाता है |
किसी अच्छे आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लेकर नीम की आयुर्वेदिक गोलियों का इस्तेमाल भी लाभकारी होता है -
पेट से जुड़ी परेशानी दूर करे
पेट में जलन, अल्सर, गैस इन सारी परेशानी को नीम का पानी पीकर दूर किया जा सकता है| यूरिन इन्फेक्शन होने पर नीम की पत्तियों को खाली पेट चबाना चाइये, जल्द आराम मिलेगा| -
नीम से गठिया (आर्थराइटिस) का उपचार
गठिया रोग के लिए नीम का तेल लाभकारी औषधि है | पुराने से पुराने गठिया का दर्द या शरीर के किसी भी भाग के जोड़ो का दर्द , पीठ का दर्द इत्यादि के लिए १ कप पानी में एक मुट्ठी नीम की पत्तियों और फूलों को उबालकर ठंडा करे, इस पानी को सुबह शाम दिन में दो बार लगातार ३ महीने तक सेवन करने से सभी प्रकार के गठिया एवं जोड़ों के दर्द से राहत मिलती है |
नीम के आयुर्वेदिक तेल की मालिश घुटनो कमर पीठ में नियमित रूप से करने में सभी गठिया दर्द में आराम मिलता है -
नाखून संक्रमण
नीम के एंटीबॉयोटिक गुणों के कारण इसे हाथ एवं पैरों के नाखून संक्रमण को रोका जा सकता है | नीम के तेल का दिन में २ बार हाथ एवं पैरों के नाखूनों में लगाने से नाखून संक्रमण से बचे रहते है |
नाखून में नीम का तेल लगाने से नाखून जड़ से मजबूत और सुन्दर बने रहते हैं | -
नीम कटने या घाव होने पर
शरीर पर किसी भी प्रकार की खुली चोट या घाव होने या कटने पर नीम के पेड़ की छाल को घर लाकर धूप में सूखा ले , सूखने के बाद उसका बारीक़ चूर्ण तैयार करे और उसे नीम के तेल या सरसो के तेल के साथ घाव पर लगा देने से घाव जल्दी सूखता है और उसके बढ़ने की कोई आशंका नहीं रहती |
नीम के उपयोग
- दवा के रूप में
नीम की पत्ती Neem ki patti लेप्रोसी , आँख की बीमारी , नकसीर , पेट के कीड़े , पाचन , भूख में कमी , त्वचा के रोग , दिल और खून की नसों की बीमारी , बुखार , डायबिटीज , मसूड़े , लिवर आदि परेशानी दूर करने में काम आती हैं।
Neem की टहनी मलेरिया में , पेट या आंतों के अल्सर , स्किन डिजीज , दांत और मसूड़ों की परेशानी आदि में काम आती है। नीम की दातुन Neem ki datun का उपयोग आज भी कई लोग करते है। यह दातुन बाजार में भी मिलती है। इससे दांत में प्लाक जमना कम होता है तथा मसूड़ों में सूजन या खून आना , मुंह से बदबू आना आदि से बचाव होता है।
Neem के फूल पित्त कम करने में , कफ मिटाने में तथा पेट के कीड़े मिटाने में काम आते हैं। - कीटनाशक के रूप में
नीम की पत्तियों को अलमारी में रखा जाता है ताकि कपड़े कीटों से बचे रहें। इन्हे गेहूं या चावल आदि भरने से पहले ड्रम या पीपे आदि में नीचे बिछाया जाता है ताकि उनमे कीड़े ना पड़ें। Neem की पत्तियां जलाकर मच्छरों को दूर किया जाता है।
नीम की पत्ती का खाद बनता है , जिसका उपयोग करने से फसल कई प्रकार की बीमारियों से बच सकती हैं। घर में गमलों में लगाए जाने वाले पौधे पर पानी में Neem का तेल डालकर छिड़काव करने से पौधे पर लगे कीट नष्ट हो जाते हैं।
निम्बोड़ी के बीज को पीस कर पाउडर बनाया जाता है फिर इसे पानी में रात भर भिगोते हैं। इस पानी को फसल पर छिड़कने से यह कीटों से बचाव करता है। यह कीड़ों को सीधे ही नहीं मारता लेकिन इसके छिड़कने से कीड़ो का पत्ती खाना , पत्तियों पर अंडे देना आदि बंद हो जाता है।
इस तरह से फसल ख़राब होने से बच जाती है। नीम कीटों का अंडे से बाहर निकलना भी रोकता है। Neem का तेल दीमक के उपचार में भी काम करता है। - खाने पीने में
नीम के फूल का उपयोग दक्षिण भारत में मनाये जाने वाले त्यौहार ‘ उगादी ‘ के समय किया जाता है। Neem के फूल और गुड़ खाकर ‘उगादी’ त्यौहार मनाया जाता है। दक्षिण भारत में कर्नाटक में Neem के ताजा फूल से कढ़ी बनाई जाती है। ताजा फूल ना हों तो सूखे फूल काम में लिए जाते हैं।
तमिलनाडु में इमली से बनाई जाने वाली रसम में इसे डाला जाता है। बंगाल में Neem की कोमल पत्ती और बैंगन की सब्जी बनाई जाती है। इसे चावल के साथ खाया जाता है।
महाराष्ट्र में गुडी पड़वा यानि नववर्ष की शुरुआत , थोड़ी मात्रा में Neem की पत्ती या उसके रस का सेवन करके की जाती है। इससे मौसम के बदलाव के कारण होने वाली परेशानी तथा पित्त विकार से बचाव होता है।
नीम की पत्ती कड़वी होने के कारण पित्त शांत करने वाली मानी जाती है। चैत्र महीने में कोमल नीम की पत्ती का सेवन करना लाभप्रद होता है। अक्सर चैत्र महीने में जानकार लोग Neem की कोमल पत्ती तोड़कर खाते दिखाई देते है।
नीम के उपयोग में सावधानी
- बच्चों के लिए नीम का तेल या पत्ती का उपयोग नुकसान देह हो सकता है। छोटे बच्चों के लिए Neem विषैला साबित हो सकता है। इससे उल्टी , दस्त , चक्कर आना , बेहोशी आदि लक्षण प्रकट हो सकते हैं। छोटे बच्चों को नीम की पत्ती या तेल आदि मुंह के द्वारा नहीं दिया जाना चाहिए।
- लम्बे समय तक Neem के तेल का उपयोग हानिकारक होता है। इससे किडनी और लीवर को नुकसान हो सकता है।
- गर्भावस्था में तथा स्तनपान कराने वाली माँ को नीम की पत्ती नहीं खानी चाहिए। नीम का सेवन गर्भपात का कारण बन सकता है।
- डायबिटीज की दवा चल रही हो तो Neem का प्रयोग सावधानी से करना चाहिए। नीम भी रक्त में शुगर की मात्रा को कम करता है।
- यदि बच्चा चाहते हों तो नीम का उपयोग नहीं करना चाहिए। यह शुक्राणु को कमजोर कर सकता है।
- यदि किसी प्रकार अंग प्रत्यारोपण का ऑपरेशन करवाया हो तो Neem का उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे दवा का असर कम होने की संभावना होती है।
- इम्यून सिस्टम से सम्बंधित दवा चल रही हो तो नीम के कारण दवा का असर कम हो सकता है , अतः सावधान रहें।
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