- Details
- Written by Sandybook
- Category: General
- Hits: 600
E-RUPI: क्या है ई-रुपी और कैसे करता काम करता है
"ई-रुपी क्या इसके क्या फायदे हमें हो सकते है तो दस्तो सरकारी योजनाओ से मिलने वाली मदत का सही जगह इस्तेमाल हो सके और डजीटल पेमेंट सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए प्रधान मंत्री मोदीजी ने हाल ही में "इ रुपया" वाउचर से पेमेंट सिस्टम जारी किया है तो यह किस तरीके से पेमेंट सिस्टम में बदलाव लाने वाला है बहुत ही ध्यान से पढियेगा। 2 अगस्त 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे लॉन्च किया है तो दोस्तों हम जानेंगे कि ई-रुपी क्या होता है और कैसे काम करता है फ्रेंड्स सबसे पहला जो प्रश्न आप सभी के दिमाग पर उठना है कि ई-रुपी क्या है तो इसको समझते हैं यह एक प्रकार का प्रीपेड डिजिटल वाउचर है इसमें आपके मोबाइल पर डिजिटल रूप में पैसा मिलता है और सिर्फ मोबाइल नंबर की मदद से इन पैसों का भुगतान भी हो जाता है SMS और क्यूआर कोड और ओटीपी(OTP) की मदद से पूरी प्रक्रिया हो जाती है
इसके लिए आपके पास किसी बैंक अकाउंट की जरूरत नहीं है , किसी कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग की जरूरत नहीं है इससे पूरी तरह कैशलेस ,कांटेक्ट लेंस, और सुरक्षित भुगतान होता है आप जान करके हैरान हो जाएंगे इसकी सबसे बड़ी खासियत यह भी होती है कि किसी को सब्सिडी या मदद के रूप में मिला पैसा सिर्फ उसी काम में खर्च किया जा सकता है जिस काम के लिए उसे मिला है मैं आपको समझा तो एक उदाहरण के रूप में उदाहरण के लिए अगर आपके पास कोरोना वैक्सीन के लिए ई-रुपी वाउचर है तो इसे वह सिर्फ करोना वैक्सीन के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा दूसरे किसी काम में नहीं साथी यह सिर्फ उस व्यक्ति के लिए इस्तेमाल हो सकता है जिसके लिए जारी हुआ है इसके लिए तकनीकी रूप से सक्षम सिस्टम तैयार किया गया है। इ रोपी बहुचर में मिली पूरी रकम का एक ही बार में पूरा भुगतान हो जाएगा क्योंकि इनमें सिर्फ उतनी ही रकम होगी जितनी उस काम के लिए तय की गई है फिलहाल अधिकतम ₹10000 कीमत के ही इ वाउचर जारी किए जा सकते हैं
एक और सवाल दिमाग में आता है कि आखिर को किसने ई-रुपी वाउचर को विकसित किया है तो भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम जिसे हम एनपीसीआई भी कहते हैं इससे वित्तीय सेवा विभाग DFS, स्वास्थ्य एवं परिवार मंत्रालय मोहफव, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण एनएचके की मदद से विकसित किया गया है इसका पूरा सिस्टम यूपीआई प्लेटफार्म पर काम करता है आगे इसे कंपनियों और संस्थाओं की ओर से भी इस्तेमाल किया जा सकेगा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इसे मंजूरी दे दी है ई-रुपी वाउचर जारी करने का काम 3 तरह के संस्थानों को मिलेगा पहला बैंक दूसरा पेमेंट सर्विस देने वाली कंपनियां, और तीसरा प्रीपेड वाउचर बनाने वाली कंपनिया।
फ़िलहाल भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया( एसबीआई ) दूसरा है पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) तीसरा है एचडीएफसी बैंक चौथे बैंक ऑफ इंडिया पांचवा केंद्र बैंक को वाउचर बनाने के किये अधिकृत किया गया है इनके अलावा फाइनेंसियल टेक्नोलॉजी कंपनी पाइन लैब्सस और भारतपे भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ने की सूचना है पहली बार इस पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल कोविड वैक्सीनेशन अभियान में कैशलेस पेमेंट सिस्टम के सिस्टम के रूप में किया गया है क्योंकि प्राइवेट अस्पतालों को शुल्क लेकर करोना का टिका लगाने की छूट दी गई है
अब हम जानते है इसके क्क्या-क्या फायदे हैं
सरकार को सब्सिडी का पैसा सही जगह पर खर्च करने में आसानी होगी | समान लोगों, कंपनियों और अस्पतालों को भी इससे फायदा होगा | सामान लोगों को क्या फायदा होगा सिर्फ मोबाइल नंबर के माध्यम से सरकार या कंपनी से पैसे लिया जा सकेगा और किसी को पेमेंट भीडिजिटल रूप से किया जा सकेगा, अन्य किसी पेमेंट माध्यमों पर निर्भरता नहीं होगी , ट्रांजैक्शन के लिए किसी भी तरह के डेबिट क्रेडिट या प्रीपेड कार्ड रखने की जरूरत नहीं होगी ,किसी तरह का अकाउंट नंबर देने की जरूरत नहीं होगी , भुगतान की प्रक्रिया तभी पूरी होगी जब कि आप वेरिफिकेशन कोड बताएंगे किस से किसी तरह की कमीशन बाजी यह फ्रॉड की गुंजाइश नहीं रहेगी
अगला फायदा संक्रमण का खतरा नहीं रहेगा भुगतान लेने वाले और देने वाली के बीच किसी तरह के सीधे संपर्क इस जरूरत नहीं होगी क्योंकि ना तो नगद भुगतान करना होगा और ना ही किसी तरह के दस्तावेज पेश करना होगा इससे किसी बीमारी का संक्रमण फैलने की गुंजाइश नहीं होगी। कोरोनावायरस के माहौल में में ऐसे किसी पेमेंट सिस्टम की सख्त जरूरत महसूस की जा रही थी। डाटा की प्राइवेसी भी बनी रहेगी आपको पेमेंट पाने या पेमेंट देने के लिए आधार नंबर आफ बैंक अकाउंट नंबर या किसी अन्य तरह की डिटेल को देने की भी जरूरत नहीं होगी इससे आपकी प्राइवेसी बनी रहेगी और डेटा का दुरुपयोग की आशंका भी नहीं रहेगी दोस्तों यह थी ई-रुपी के बारे में संपूर्ण विश्लेषण आ जानकारी।
- Details
- Written by Sandybook
- Category: General
- Hits: 397
भारत और एशिया का पहला डॉल्फिन अनुसन्धान केंद्र
भारत और एशिया का पहला राष्ट्रीय डॉल्फिन अनुसंधान केंद्र (NDRC) बिहार राज्य के पटना विश्वविद्यालय परिसर में गंगा नदी के तट पर स्थापित किया जाएगा.
मानसून के मौसम के बाद इस केंद्र पर काम शुरू होने की उम्मीद है.
विशेषज्ञों की टीमों द्वारा गंगा नदी में वर्ष, 2018-19 में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, इस नदी में लगभग 1,455 डॉल्फ़िन देखी गईं.
बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने यह कहा है कि, राज्य सरकार पटना विश्वविद्यालय के परिसर में राष्ट्रीय डॉल्फिन अनुसंधान केंद्र स्थापित करने के
लिए कड़ी मेहनत कर रही है.
राष्ट्रीय डॉल्फिन अनुसंधान केंद्र (NDRC): मुख्य विशेषताएं
• इस राष्ट्रीय डॉल्फिन अनुसंधान केंद्र की स्थापना गंगा नदी की डॉल्फिन के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है.
• यह केंद्र पटना विश्वविद्यालय के भीतर 4400 वर्ग मीटर भूमि पर स्थापित किया जाएगा और यह केंद्र गंगा नदी से करीब 200 मीटर की दूरी पर होगा.
• इस केंद्र के वर्ष 2022 तक स्थापित होने की उम्मीद है. शुरू में वर्ष, 2011 में यह परियोजना प्रस्तावित की गई थी.
महत्त्व
यह राष्ट्रीय डॉल्फिन अनुसंधान केंद्र लुप्तप्राय गंगा डॉल्फिन के संरक्षण के प्रयासों को बढ़ावा देगा और डॉल्फ़िन के बदलते व्यवहार, भोजन की आदतों,
उत्तरजीविता कौशल, मृत्यु के कारण और अन्य पहलुओं सहित इन डॉलफिन्स पर गहन शोध को सक्षम करेगा.
यह NDRC परियोजना डॉल्फिन के लिए फायदेमंद होगी, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2020 को की थी.
यह प्रोजेक्ट डॉल्फिन क्या है?
• प्रोजेक्ट टाइगर की सफलता को दोहराने के लिए पिछले साल अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान प्रोजेक्ट लॉयन के साथ प्रधानमंत्री द्वारा प्रोजेक्ट
डॉल्फिन की घोषणा भी की गई थी.
• इस प्रोजेक्ट डॉल्फ़िन का उद्देश्य देश की नदियों और महासागरों में डॉल्फ़िन का संरक्षण और सुरक्षा करना है.
• यह परियोजना, विशेष रूप से अवैध शिकार विरोधी गतिविधियों और गणना में आधुनिक तकनीक के उपयोग के माध्यम से डॉल्फ़िन और जलीय आवास के
संरक्षण को शामिल करेगी.
गंगा की डॉल्फिन
• गंगा की डॉल्फिन भारत का राष्ट्रीय जलीय जंतु है. यह दुनिया की चार मीठे पानी की डॉल्फ़िन प्रजातियों में से एक है.
• अन्य तीन मीठे पानी की डॉल्फ़िन प्रजातियां चीन की यांग्त्ज़ी नदी (अब विलुप्त), पाकिस्तान की सिंधु नदी और दक्षिण अमेरिका की अमेज़ॅन नदी में पाई जाती
हैं.
• गंगा की डॉल्फिन मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप, खासकर गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना और कर्णफुली-सांगू नदियों में पाई जाती है.
• डॉल्फ़िन्स कम से कम 05 फीट से 08 फीट गहरा पानी पसंद करती हैं. ये आमतौर पर अशांत पानी में पाई जाती हैं, जहां इनके पास खाने के लिए पर्याप्त
मछलियां होती हैं.
• बिहार में देश की अनुमानित 3,000 डॉल्फ़िन आबादी का लगभग आधा हिस्सा है.
- Details
- Written by Sandybook
- Category: General
- Hits: 448
In our Hindu culture, lighting a lamp denotes dispelling away darkness. The lamp is, in most Indian languages, called as “Jyoti”. When we pray to Goddesses by lighting a lamp, the belief is that we will be richly rewarded with tremendous prosperity. Married women or girls of marriageable age are always advised to light a lamp and pray for the welfare of their family, pray for marriage to a good boy, pray for motherhood. In reality, it is said that Goddess Rajarajeshwari resides in the lamp – she represents the combined form of Durga, Lakshmi and Saraswathi.
Propitiating the Deepalakshmi (in the form of Rajarajeshwari) with vermillion, flowers, and stotras every Friday can give you benefits that cannot be described in words.
Look at this stanza from Lalitha Sahasranamam
“Om Suvasinyay namah
Om Suvasin archanapreethayay namah”.
The philosophy of the lamp is profound. We light away lamp to drive away sadness and welcome happiness with open arms. You want to acquire knowledge and drive away ignorance, so we pray to Deepalakshmi.
Bottom portion of the lamp: (lotus seat): Lord Brahma
The middle pipe of the lamp: Lord Venkateswara
The portion where oil/ghee is filled: Rudran
The portion where wick settles: Lord Maheswara
The end of the wick: Sadashiv
Ghee/Oil: Natham
Lamp, as mentioned earlier, represents Durga, Saraswathi and Lakshmi.
The 5 faces of a lamp denote the 5 qualities that a woman needs to have:
- Affection
- Intelligence
- Resoluteness
- Patience
- Caution
The portion where the oil is filled indicates the mind of the woman.
When you light a lamp, all the five qualities of the woman gets prominence.
So, when you light a lamp, you light your soul. It helps us in developing our intellect.
Nowadays, you can see many people (including males) lighting lamps in temples or donating oil to the temple or donating a lamp to the temple. Lighting a lamp in the temple brightens your life. If we light a lamp in our homes every evening and pray by reciting a few shlokas, it will make our lives shimmer like the lamp.
- Ghee/Oil or a mixture of oil and ghee can be used to light the lamp.
- When you show the lamp during aarthi, rotate the lamp in the form of “OM” from the foot till the head at least thrice.
- Lamp is always a good omen – if someone gifts you a lamp, accept it whole-heartedly. If the lamp flickers, it is an auspicious sign.
- At the least, light a lamp in front of Devi Maa every Friday with till oil.
- During the Karthik month, lighting lamps in the front of homes is considered to be very powerful.
- Always smear the lamp with vermillion and sandal powder.
- Offer flowers to the lamp.
- Pray to Lord Ganesha and then your family deity before lighting the lamp.
Page 1 of 2
We have 65 guests and no members online
भारत | Tech | General | Science | Space
मध्यकालीन इतिहास (Medieval History) | Valentine day quotes | Valentine Day animated Greetings |

