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जरुरत के मुताबिक जिंदगी जिओ - ख्वाहिशों के मुताबिक नहीं।
क्योंकि जरुरत तो फकीरों की भी पूरी हो जाती है;
और ख्वाहिशें बादशाहों की भी अधूरी रह जाती है।


मैं गरीब नहीं हूँ क्योंकि मुझे मेहनत से कमाना और सुकून से सोना आता है।
गरीब तो वो लोग हैं जिन्हें बेईमानी, भ्रष्टाचार और रिश्वत से भी चैन नहीं मिलता।
और सदैव ही अनिंद्रा और भय से घिरे रहते हैं।


कोई व्यक्ति कितना ही महान क्यों न हो, आंखे मूंदकर उसके पीछे न चलिए।
यदि ईश्वर की ऐसी ही मंशा होती तो वह हर प्राणी को आंख, नाक, कान, मुंह, मस्तिष्क आदि क्यों देता?


जीवन का सबसे बड़ा अपराध - किसी की आँख में आंसू आपकी वजह से होना।
और
जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि - किसी की आँख में आंसू आपके लिए होना।


मांगो तो अपने रब से मांगो;
जो दे तो रहमत और न दे तो किस्मत;
लेकिन दुनिया से हरगिज़ मत माँगना;
क्योंकि दे तो एहसान और न दे तो शर्मिंदगी।


सत्य के लिए हर वस्तु की बलि दी जा सकती हैं;
किन्तु सत्य की बलि किसी भी वस्तु के लिए नहीं दी जा सकती हैं।


कोई व्यक्ति कितना ही महान क्यों न हो, आंखे मूंदकर उसके पीछे न चलिए।
यदि ईश्वर की ऐसी ही मंशा होती तो वह हर प्राणी को आंख, नाक, कान, मुंह, मस्तिष्क आदि क्यों देता?


जिंदगी में दो चीज़ें हमेशा टूटने के लिए ही होती हैं:
"सांस और साथ"
सांस टूटने से तो इंसान 1 ही बार मरता है;
पर किसी का साथ टूटने से इंसान पल-पल मरता है।


सत्य के लिए हर वस्तु की बलि दी जा सकती हैं;
किन्तु सत्य की बलि किसी भी वस्तु के लिए नहीं दी जा सकती हैं।


मांगो तो अपने रब से मांगो;
जो दे तो रहमत और न दे तो किस्मत;
लेकिन दुनिया से हरगिज़ मत माँगना;
क्योंकि दे तो एहसान और न दे तो शर्मिंदगी।


दुनिया में कोई भी चीज़ अपने आपके लिए नहीं बनी है।
जैसे:
दरिया - खुद अपना पानी नहीं पीता।
पेड़ - खुद अपना फल नहीं खाते।
सूरज - अपने लिए हररात नहीं देता।
फूल - अपनी खुशबु अपने लिए नहीं बिखेरते।
मालूम है क्यों?
क्योंकि दूसरों के लिए ही जीना ही असली जिंदगी है।


ईश्वर का दिया कभी अल्प नहीं होता;
जो टूट जाये वो संकल्प नहीं होता;
हार को लक्ष्य से दूर ही रखना;
क्योंकि जीत का कोई विकल्प नहीं होता।


कोई दुनिया को नहीं बदल सकता, सिर्फ इतना हो सकता है कि इंसान अपने आप को बदले तो दुनिया अपने आप बदल जायेगी।
सुप्रभात।


जिंदगी जीना आसान नहीं होता;
बिना संघर्ष कोई महान नहीं होता;
जब तक न पड़े हथोड़े की चोट;
पत्थर भी भगवान नहीं होता।


 बुराईयां जीवन में आयें उससे पहले उन्हें मिट्टी में मिला दो;
अन्यथा वे तुम्हें मिट्टी में मिला देंगीं।


नारद जी ने कृष्णा से पूछा, "प्रभु, इस दुनिया में सब के सब दुखी क्यों हैं?"
कृष्णा जी बोले, "खुशियाँ तो सबके पास हैं, बस एक की ख़ुशी से दूसरा परेशान है।


दुनिया में कोई भी चीज़ अपने आपके लिए नहीं बनी है।
जैसे:
दरिया - खुद अपना पानी नहीं पीता।
पेड़ - खुद अपना फल नहीं खाते।
सूरज - अपने लिए हररात नहीं देता।
फूल - अपनी खुशबु अपने लिए नहीं बिखेरते।
मालूम है क्यों?
क्योंकि दूसरों के लिए ही जीना ही असली जिंदगी है।


दो दिन की जिंदगी है, इसे दो उसूलों से जिओ।
रहो तो फूलों की तरह; और
बिखरों तो खुशबु की तरह।.....


कोई कार्य तुच्छ नहीं होता। यदि मनपसन्द कार्य मिल जाए, तो मूर्ख भी उसे पूरा कर सकता हैं, किंतु बुद्धिमान इंसान वही हैं, जो प्रत्येक कार्य को अपने लिए रुचिकर बना ले।


चिंता और चिता में सिर्फ एक बिंदु का अंतर है।

जिंदगी में दो चीज़ें हमेशा टूटने के लिए ही होती हैं:
"सांस और साथ"
सांस टूटने से तो इंसान 1 ही बार मरता है;
पर किसी का साथ टूटने से इंसान पल-पल मरता है।

जीवन का सबसे बड़ा अपराध - किसी की आँख में आंसू आपकी वजह से होना।
और
जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि - किसी की आँख में आंसू आपके लिए होना।

जब किसी महापुरुष से पूछा गया कि गुस्सा क्या चीज़ है?
तो महापुरुष ने बहुत खूबसूरत जवाब दिया -
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"किसी की गलती की सज़ा खुद को देना"।


मनुष्य सुबह से शाम तक काम करके उतना नहीं थकता;
जितना क्रोध और चिंता से एक क्षण में थक जाता है।


जिंदगी जीना आसान नहीं होता;
बिना संघर्ष कोई महान नहीं होता;
जब तक न पड़े हथोड़े की चोट;
पत्थर भी भगवान नहीं होता।


कभी भी 'कामयाबी' को दिमाग और 'नकामी' को दिल में जगह नहीं देनी चाहिए।
क्योंकि, कामयाबी दिमाग में घमंड और नकामी दिल में मायूसी पैदा करती है।


कौन देता है उम्र भर का सहारा। लोग तो जनाज़े में भी कंधे बदलते रहते हैं।


मनुष्य सुबह से शाम तक काम करके उतना नहीं थकता;
जितना क्रोध और चिंता से एक क्षण में थक जाता है।


ईश्वर का दिया कभी अल्प नहीं होता;
जो टूट जाये वो संकल्प नहीं होता;
हार को लक्ष्य से दूर ही रखना;
क्योंकि जीत का कोई विकल्प नहीं होता।


 

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