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वो लुगाइयाँ भी गजब होवें जो पूरे
7-8 घंटें बैठके पुरे मोहल्ले की चुगली कर लिया करें
आर
बाद में यो कहके उठज्यां ..
.
.
.
खैर मरण दो उसने चाहे वो कुवें में डेह पड़ो उसते हमने के लेणा……


एक # बुढढा_एक_बुढढी को # घूर रहा था )….
बुढढी उसे # गाली_देने लगी………….
एक # छोरे ने पूछा”
अरे # ताउ कै हुआ?? . . .
बुढढा: कुछ नही बेटा,
# पुराना_कलेँनडर है हवा मेँ # फडफडा
रहा है…..


एक बा एक जाट तै उसकी सहेली न मैसेज भेज्या – आई मिस यू (I Miss You).
जाट ना पूरा दिमाग ला दिया पर समझ नी आया के जवाब द्यूं।

आखिर २ घंटे सोचण पाछै जाट न जवाब दिया – आई मिस्टर यू (I Mister You).


एक बार एक गाम मैं, एक ताऊ मर गया,
पड़ोसी नै देख्या, ताऊ की पत्नी, मरे होए ताऊ धोरा रोटी खाँण लाग रही थी,
पड़ोसी बोल्या – ताई तू रोटी खारी है, आर ताऊ तो मरया पड़्या?
ताई बोली – रै डट जा, रोटी खा लेण दे, ताऊ तो एके रुक्के मैं भाजका उठैगा।


भूंडू बेचारे की मां गर-गी । उसका बाबू कई साल पहल्यां-ए मर-ग्या था । ईब भूंडू के घर में कुल दो प्राणी रह-गे – वो खुद, अर उसकी बहू ।

भूंडू सारा दिन माड़ा-सा मन बणा कै बैठा रहता । उनके घरां एक कुत्ती आया करती । एक दिन भूंडू आपणी बहू तैं बोल्या – “देख भागवान, न्यूं कहया करैं अक मरे पाच्छे आदमी की
जूणी (योनि) बदल ज्या सै । के बेरा, मेरी मां या कुत्ती बण-गी हो । देख, इसकी खूब सेवा करया कर ।”

फिर भूंडू की बहू उस कुत्ती की आच्छी सेवा करण लाग-गी । उसनै रोटी खुवाती, कदे लस्सी पिलाती । एक दिन के होया, उस कुत्ती गैल्यां लाग-कै एक कुत्ता भी घरां आ-ग्या ।

भूंडू की बहू घूंघट काढ़ कै घर का काम करण लाग रही थी । भूंडू नै देख्या अक कोए बड्डा आदमी भी कोन्या दीखता हाड़ै, तै फिर या घूंघट किस तैं काढ़ रही सै ? भूंडू उस तैं बोल्या –
“भागवान, यो घूंघट किस-तैं काढ़ रही सै ?”

उसकी बहू बोल्ली – “देख बाहर, तेरी मां गैल्यां तेरा बाबू भी आ रहया सै”!


एक बै एक ताऊ खड़ा था बस स्टैंड पै । घणी वार हो-गी, कोए बस ना आई । इतणे में एक छोरी बी बस स्टैंड पै आ-कै खड़ी होगी । गर्मी भोत थी, छोरी नै छतरी खोल ली । पाच्छै-पाच्छै
एक छोरा बी आ-ग्या अर छोरी नै छेड़ण लाग-ग्या ।

छोरी बोल्ली – “ए छोरे, या छतरी देखी सै, लाग-गी ना तै बम्बई जा-कै पड़ैगा, के हीरो बण रहया सै !”

इतणे में ताऊ बोल पड़्या – “ए छोरी, मैं घणी वार तैं बस की बाट देखूं सूं, एक छतरी की ताडी मेरै मार दे, रोहतक जाणा सै !!”


एक बै एक रोडवेज बस कंडक्टर की शादी हुई । सुहाग रात को जब वो अपने कमरे में गया तो देखा कि उसकी बहू खाट के बीच में बैठी थी ।

कंडक्टर उसनै बिचाळे में बैठी देख कै बोल्या – थोड़ी सी परे नै हो ले, हाड़ै एक सवारी और बैठैगी !!


चालीस साल का बदले गाळ में जावै था, एक ऊत सा बाळक बोल्या – ताऊ, राम-राम ।

बदले नै “ताऊ” कहलवाना कुछ आच्छया-सा ना लाग्या, उसनै कोई जवाब ना दिया अर आगे-नै लिकड़ लिया ।

आगलै दिन वो छोरा फिर बोल्या – ताऊ राम-राम । बदले तैं ना रहया गया अर उस छोरे तैं बोल्या – छोरे, तू मन्नै “काका” नहीं कह दे ?

छोरा बोल्या – “काका” कह दूंगा तै के हो ज्यागा ?

बदले बोल्या – जै तू मन्नै “काका” कह देगा तै मैं तेरी मां की बगल में चूल्हे धोरै बैठ कै गर्मा-गर्म रोटी खा लूंगा ।

छोरा बोल्या “ले तै, फिर तन्नै मैं “मामा” कह दूं सूं – चूल्हे धोरै बैठ कै, तवे पर-तैं आप्पै तार-कै कत्ती तात्ती-तात्ती रोटी खा लिये”!!


ak jaat ne badi badi muchah bda rakhi thi. ak agrej ke pasand aa gyi.agrej bole ki ye muchah
kitne ki di. jaat ye muchah na bikakarh. fer jaat ne Sochi ki agrej sah kistriyah bevkuf
mana de . jaat bola kon si laga ak side 200 ki. or dusre side ki 500 ki . agrej ki 500 wali
de do. jaat bhitrah gya or char pach baal ak rabad me bad ke agrej tah de diye. agrej what
is this muchah toh aapke muh par h.jaat muchah ke mahrodi laga kah ji ye toh showroom h maal
toh godam se milega.

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