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क्यों चक्कर काटे सै जा किते और ट्राई करले
तेरी मेरी जोट नहीं मिलती
हाडे तेरी दाल नहीं गलती
मेरा बाबु नाटे सै जा किते और ट्राई करले
जमिदारे का काम से म्हारे खेत में जाना पड ज्यागा
आवे पसीना देहि पे तेरा सारा मेकअप झडजागा
मेरी दादी नाटे से जा किते और ट्राई करले
क्यों चक्कर काटे सै जा किते और ट्राई करले
सर पे पल्ला करके चाल्ले बीर मेरे हरयाने मै
मेरा दादा ड़ोगा मारेगा तन्ने देख विदेशी बाने मै
क्यों इतनी पाटे से जा किते और ट्राई करले
क्यों चक्कर काटे सै जा किते और ट्राई करले
म्हारे घर मै साँझ सवेरे भजन आरती होवे सै
तेरी पार नहीं पड़नी तू आठ बजे तक सोवे सै
मेरी माँ भी नाटे सै जा किते और ट्राई करले
क्यों चक्कर काटे सै जा किते और ट्राई करले
बाबु मेरा छो आला उसका चाल्ले दाठोरा पान्ने मै
जमा कति सोच लिया से रहना देवरखाने मै
क्यों न्यारी पाटे से जा किते और ट्राई करले
क्यों चक्कर काटे सै जा किते और ट्राई करले

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एक बारी, एक जाट ने शमशान घाट में हल जोड़ दिया
भूत किते बाहर जा रह्या था.
भूतनी जाट न डरावन खातर कांव कांव करण लागी. पर जाट ने कोई परवाह कोणी करी.
आख़िर भूतनी बोली “तू यो के करह सै”
जाट बोल्या “में उरे बाजरा बोवुंगा”
...
भूतनी बोली “हम कित रहंगे”
जाट बोल्या “मनें ठेका नि ले राख्या.
भूतनी बोली “तू म्हारे घर का नास मत करै, हाम तेरे घर में 100 मण बाजरा भिजवा दयांगे”.
जाट बोल्या “ठीक सै लेकिन तड़की पूंचना चाहिए नि तो में आके फेर हल जोड़ द्यूंगा”
शाम नै भुत घर आया तो भूतनी बोली आज तो नास होग्या था.
न्यूं न्यूं बणी अर जाट 100 मण बाजरे में मसाए मान्या.
भुत ने भोत गुस्सा आया और बोल्या तने क्यों ओट्टी, मन्ने इसे जाट भोत देखे सै.
मन्ने उसका घर बता में उसने इब सीधा कर दयुन्गा.
अर भुत जाट कै घर चल्या गया.
जाट कै घर में एक बिल्ली हील री थी. वा रोज आके दूध पी जाया करदी.
जाट नै खिड़की में एक सिकंजा लगा लिया और रस्सी पकड़ के बैठ ग्या अक आज बिल्ली आवेगी और मैं उसने पकडूँगा.
भुत नै सोची तू खिड़की मैं बड़के जाट ने डरा दे.
वो भीतर नै सीर करके खुर्र-खुर्र करण लाग्या आर जाट नै सोची – बिल्ली आगी.
उसने फट रस्सी खिंची आर भुत की नाड़ सिकंजा मैं फस गी आर वो चिर्र्र – चिर्र्र करण लाग ग्या.
जाट बोल्या रै तू कोण सै ?
वो बोल्या मैं भुत सूं.
जाट बोल्या उरै के करे सै ?
भुत बोल्या “मैं तो न्यू बुझन आया था एके तू 100 मण बाजरे मैं मान ज्यागा अके पूली भी साथै भिजवानी सै?
ठीक कही सै – जाट के आगे भुत भी नाचे सै

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एक अमेरिकन मुझसे बोला भाई साहब बताइये आपका भारत महान है !
तो सँसार के इतने आविष्यकरो मेँ आपके देश का क्या योगदान है ?
मैँ बोला रे अमेरिकन सुन, सँसार की पहली फायर प्रूफ लेडी भारत मेँ हुई थी!
नाम था "होलिका" आग मैँ जलती नही थी, इसलिये उस वक्त फयर ब्रिगेड चलती नही थी !!

सँसार की पहली वाटर प्रूफ बिल्डिँग भारत मेँ हुई नाम था भगवान विष्णु शैया "शेषनाग"!
शेषनाग पाताल गये धरती पर रहे "विशेषसनाग "
दुनिया के पहले पत्रकार "नारदजी" हुये जो किसी राजव्यवस्था से नही डरते थे !
तीने लोक की सनसनीखेज रिपोर्टिँग करते थे !!
दुनिया के पहले कॉँमेन्टेटर "सँजय" हुऐ जिन्होँने नया इतिहास बनाया!
महाभारत के युद्ध का आँखो देखा हाल अँधे "ध्रतराष्ट" को उन्ही ने सुनाया !!
दादागिरी करना भी दुनिया हमने सिखाया
क्योँ वर्षो पहले हमारे "शनिदेव" ने ऐसा आतँक मचाया !!
कि "हफ्ता" वसूली का रिवाज उन्ही के शिष्यो ने चलाया !
आज भी उनके शिष्य हर शनिवार को आते है!
उनका फोटो दिखाते है हफ्ता ले जाते है!!
अमेरिकन बोला दोस्त फालतू की बाते मत बनाओ !
कोई ढँग का आविष्यकार हो तो बताओ !!
(जैसे हमने इँसान की किडनी बदल दी, बाईपास सर्जरी कर दी आदि)
मैँ बोला रे अमेरिकन सर्जरी का तो आइडिया ही दुनिया को हमने दिया था !
तू ही बता "गणेशजी" का ऑपरेशन क्या तेरे बाप ने किया था!!


एक बार बनिए का ब्याह
होगया .........उसने क्यां ऐ का न बेर
था ....थोड़े दिन पाछे उसके घर आले कहन
लाग गे की बेटा बालक बुलक कर
ले ........तो बनिए का एक बढ़िया जाट
दोस्त था ....वो उस धोरे चला गया और
बोल्या भाई ये बालक क्यूकर
होया करे ......तो जाट बोल्या भाई तू
रात ने अपनी बाननी ने ले क म्हारे घेर में
आज जाइये अर्र दिवा लियईये ....
रात ने बनिया पहुच जा है बाननी ने ले
क.....तो जाट बनिए ते दिवा पकड़ा दे है
और बनिए ने सुथरी ढाल समझा दे है
की क्यूकर होया करे बालक ......
कई साल बाद बनिए क घर आवे है जाट....देखे
है की बनिए क ५-६ बालक हो रहे
थे ......तो जाट पूछे है की आखिर तन्ने लाग
ऐ गया बेरा की बालक क्यूकर
होया करे ....तो बनिया बोल्या हाँ इसमें
के करना था ....बस दिवा ऐ पकड़ना था ...


ताऊ बैठा हरियाणा रोड्वेस् की बस मै सफ़र करे था. रोहतक ते जावे था हिसार. रास्ते मे फ्लाइंग आले आ टपके टिकट चेक करण.
ताऊ धोरे जा के बोल्या , ला ताऊ टिकट दिखा. ताऊ ने अपणा झोला खोल्या , लत्ता के बीच मै ते एक प्लास्टिक् की थैली काढी, ऊस्के माह् ताऊ ने रोटी बान्ध रखी थी. रोटी के बीच ताऊ ने धर राख्या धडी पक्का चूर्मा. ताऊ ने धीरे धीरे चूर्मे मे हाथ घुमा के टिकट काढि अर फ्लाइंग आले कानी बढा दी. चैकर नै टिकट का हाल देख्या, कती ए चीकणी पडी थी. छो मे आ के बोल्या , अह रे ताऊ यो भी किम्मे धरण की जगह सै? सारी टिकट भुन्डी ढाल चिकणी कर दी, इस्मे के देखू मै? ताऊ लाहप्सी सा मुह बना के बोल्या , के करू बेटा बुड्डा आदमी सू , टिकट् कद्दे खू न जा, इसे खातिर घणी सम्भाल् के धर रखी थी. चैकर बोल्या, चूर्मे ते सेफ जगह् कौणी थी? न्यू कह् के वो आगे चला गया. ऊसी ताऊ धोरे एक दूसरा ताऊ भी बैठ्या था, वा न्यू बोल्या अह रे बावलीबूच, चूर्मा भी कोई टिकट धरण् कि जगह् से ? तू भी बुढापे मै कती बावला हो गया. ताऊ शैड् देनी सी बोल्या, ”’इसा बावला भी ना सू, 2 साल ते इसी टिकट पे सफ़र कर रहया सू”


एक फौजी भाई
की राजस्थान के बोर्डर
पै ड्यूटी लाग-गी ।
जाड्याँ (सर्दियों) के
दिन आ गए, फौजी नै
सोची अक परिवार तैं
मिल्ले घणे दिन हो-गे, क्यूं
ना आपणी "फैमिली" न
हाड़ै आपणै धोरै बुला ल्यूं ।
उसनै घरां आपणे बाबू धोरै
चिट्ठी लिक्खी - "बाबू,
सर्दी शुरू हो-गी सैं,
मेरी फैमिली नै भेज दे ।"
ईब भाई, बूढ़ा सोच में पड़-
ग्या अक ये "फैमिली" के
हो सै ? फिर उसनै
अंदाजा लगाया अक उसनै
जाड्याँ में फैमिली मंगाई
सै, तै "फैमिली" का मतलब
"रजाई" होवै सै ।
घर में कोई रजाई ना थी ।
बूढ़े नै
चिट्ठी गिरवा दी -
"बेटा, देख, तेरी फैमिली तै
पाछले जाड्याँ में
बाळकां नै पाड़ दी थी,
अर तन्नै बेरा सै अक मैं तै सूं
ऐं बिना फैमिली का । पर
बेटा, तू कहै तै पड़ौस के
भीम की फैमिली नै भेज दूँ,
वा सै भी नई ए ।"


एक बार एक बुढा एक दिन रेल में जावे था.. एक छोरा धोरे खड़ा था आर थोड़ी सी भीड़ थी बोल्या रे छोरे पा पे पा क्यूँ धरा ! छोरा बोल्या ताऊ माफ़ कर दे लग गया होगा भीड़ में ! बोल्या जे मेरे खून लिकड़ आता तो ? छोरा बोल्या ताऊ खून तो कोणी लिकड़ा !
बोल्या जे लिकड़ आता तो मेरे चक्कर आते तो ?
छोरा बोल्या ताऊ कित आये चक्कर ?
ताऊ बोल्या फेर में पड़ जाता तो?
ताऊ तू कित पड़ा ?
ताऊ बोल्या "फेर मेरे और चोट लग जाती "
छोरा बोल्या ताऊ कित लगी चोट ?
ताऊ बोल्या मेरे धनस्बा हो जाता तो आर आड़े कोए डाक्टर भी कोन्या
छोरा बोल्या ताऊ कित होया धनस्बा ?
ताऊ बोल्या फेर मन्ने हस्पताल जाना पड़ता आर उड़े मन्ने कोए दाखल नहीं करता तो ?
छोरा दुखी हो लिया जनता लखावे ! एक ने हिम्मत करी पूछ लिया ताऊ के होया कोए बात ना बिचारे का भीड़ में पा पड़ गया होगा माफ़ कर दे ! पा घना जोर तें दब गया के ?
ताऊ बोल्या ना जे दब जाता तो ?


छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था
एक नाई, एक खाती ,एक काला लुहार था ।
छोटे घर थे ,हर आदमी बङा दिलदार था
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था ।
कितै रोटी खा लेतै ,हर घर मे भोजऩ तैयार था,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था ।
बिटोङे पे घिया तौरी हो जाती
जिसके आगे शाही पनीर बेकार था,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था ।
दो मिऩट की मैगी ना ,झटपट दलिया तैयार था,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था ।
नीम की निबॊँली और शहतुत सदाबहार था,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था
अपणा घङवा कस बजा लेते, “PP" पुरा संगीतकार था
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था


"यारो सिरसा का लाणा ,
भिवानी का बाणा
अर्र दुनिया मं मशहुर स हिसार का दाना,,
जींद का सम्ध्याना ,
नारनोल का न्याना ,
अर्र दुनिया म मशहुर स महेंद्रगढ़ का खाना,,
रोहतक की चतुराई ,
सोनीपत की अंगडाई ,
अर्र दुनिया म मशहुर स पानीपत की लड़ाई,,
करनाल का साथ ,
पंचकुला का पाठ
अर्र दुनिया म मशहुर स चंडीगढ़ का हाथ,,
अम्बाला की चाट ,
कैथल की खाट , अर्र दुनिया म मशहुर स हरयाने का जाट.


टीचर क्लास में सो गई, तो एक
छोटा शरारती बच्चा उन्हें जगाने गया।
बच्चा बोला,"टीचर, आप क्लास में
सो रही हैं।"

टीचर: नहीं बेटा, मैं सो नहीं रही, मैं
तो आंखें बंद करके भगवान से बातें कर
रही थी।

अगले दिन वह बच्चा क्लास में सो गया,
तो टीचर ने उसे जगाया।
टीचर: बेटा, क्लास में सोते नहीं है।

बच्चा: नहीं मैम मैं सो नहीं रहा था। मैं
तो भगवान से बातें कर रहा था।

टीचर: अच्छा, तो क्या बोले भगवान?

बच्चा: भगवान बोले कि उनकी तो आपसे
कोई बात नहीं हुई थी।


एक गुंडा सेविंग और हेयर कटिंग के लिये सैलुन में गया।
नाई से बोला की अगर मेरी सेविंग ठिक से बिना कटे छंटे की तो मुहमाँगा दाम दूँगा।
अगर कहीं भी कट गया तो गर्दन उड़ा दूगा।
सभी नाईयो ने डर के मारे मना कर दिया।
अंत में वो गुंडा गाँव के नाई के पास पहुँचा।
काफी कम उम्र का लड़का था।
उसने कहा ठिक है बैठो मैं बनाता हूँ।
उस लड़के ने काफी बढ़ीया तरीके से गुंडे की सेविंग और हेयर कटिंग कर दी।
गुंडे ने खुश होकर लड़के को दस हजार रूपया दे दिया।
और पूछा-
तुझे अपनी जान जाने का डर नहीं था क्या?
लड़के ने कहा-
डर ? डर कैसा?
पहल तो मेरे हाथ में थी।
गुंडे ने कहा- 'पहल तुम्हारे हाथ में थी' का मतलब नहीँ समझा।

लड़के ने हँसते हुये कहा,
उस्तरा तो मेरे हाथ में थी।
अगर आपको खरोंच भी लगती तो आपकी गर्दन तुरंत काट देता।

बेचारा गुंडा!
ये जवाब सुनकर पसीने से लथपथ हो गया।

नोट- डर के आगे ही जीत है।


हरियाणा पुलिस को नए रंगरूटों की जरूरत थी अपणा रलदू भी चला गया Interview देण
चयनकर्ता ने एक आसन सा सवाल पूछा - पर रलदू ने सवाल का बना दिया बवाल
सवाल था आप बाजार सेब लें जाओगे तो 50 रुपए किलो के हिसाब से 100 ग्राम सेब के कितने रूपये दे कर आओगे
रलदू बोल्या जै मन्नै 100 ग्राम के भी रूपये दिए तो पुलिस में के इसी तीसी कराण खातर भर्ती हो रहा सु
चयनकर्ता को जवाब में मजा आया उसने जवाल को आगे बढाया अगर मैं
जाऊ तो
कितने देने पड़गे
रलदू बोल्या- जनाब आप हुकम करो सेब की पूरी पेटी घर पहुचा देंगे

-अच्छा तुम्हारी पत्नी तो पुलिस में नही है ना अगर वो जाये तो

-जनाब मैं अपनी लुगाई ने घनी अच्छी तरह जानू सुं उसने खरीदारी का घना है शोक पर उसे 100 ग्राम खरीदने होंगे तो 100 ग्राम का ही पूछे की भाव

-अच्छा अगर तुम्हारा भाई जाये तो

-जनाब मन्नै वो बाजार जाते तो भोत बार देख्या सै पर वो तो हर बार तम्बाकू ले कै आ ज्यावै सै

-अच्छा अगर आपके पिता जी जाये तो कितने रुपये दे कर आएंगे

-जनाब उनके दाँत ना है वो बस केले खाते हैं

-अच्छा अगर तुम्हारी बहन जाये तो

-जनाब मेरी तो एक बहन थी उसका ब्याह हो ग्या इब वा जाने या फेर मेरा जीजा

-अच्छा तुम्हारा कोई दोस्त है

-हाँ है जनाब रामफल

-अच्छा वो सेब खाता है?

-कोए खुवा दे तो खा ले सै
नु बताओ जनाब तनखा दो गे एक आदमी की अर सेब खरीदने पे ला दिया पूरा खानदान

श्रीमान जी अपने भी सवाल को खूब खीचा है लगता है आपका सेब का बगीचा है अब कुछ भी हो जनाब आप अपने सवाल का उत्तर ले मैं उसको 5 रपये दूंगा और कहूँगा इतने के सेब दे दो पर इतने के कितने

-जी वो सेब आले की मर्जी कितने भी दे दे

अच्छा छोड़ो अगर आम आदमी जाये सेब खरीदने तो

- आम आदमी की बात सुनते ही रलदू serious हो गया थोडा सा अर बोला जनाब आम आदमी को आप लोगो ने सेब खरीदने लायक ही कड़े छोड़ा से आम आदमी तो सेब का ठेला लगाता है खरीदने तो खास ही जाता है

रलदू तुमने तो जरा सी बात का बना दिया बवाल

- रलदू बोल्या मुझे तो शुरु से ही पसंद नही है सवाल मेरी विचार में संसार में जितने भी गड़बड़ है सेब ही उसकी जड़ है अगर उस दिन आदम और हुवा ना खाते सेब ना मै आता ना आप आते ना 100 ग्राम होता ना 500 ग्राम

interview का ये हुआ परिणाम रलदू आजकल सब्जीमंडी में डंडा घुमाते है खुद तो भर पेट खाते हैं साहब के लिए 100 ग्राम पहुचाते हैं

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