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एक बार एक बुढा एक दिन रेल में जावे था.. एक छोरा धोरे खड़ा था आर थोड़ी सी भीड़ थी बोल्या रे छोरे पा पे पा क्यूँ धरा ! छोरा बोल्या ताऊ माफ़ कर दे लग गया होगा भीड़ में ! बोल्या जे मेरे खून लिकड़ आता तो ? छोरा बोल्या ताऊ खून तो कोणी लिकड़ा !
बोल्या जे लिकड़ आता तो मेरे चक्कर आते तो ?
छोरा बोल्या ताऊ कित आये चक्कर ?
ताऊ बोल्या फेर में पड़ जाता तो?
ताऊ तू कित पड़ा ?
ताऊ बोल्या "फेर मेरे और चोट लग जाती "
छोरा बोल्या ताऊ कित लगी चोट ?
ताऊ बोल्या मेरे धनस्बा हो जाता तो आर आड़े कोए डाक्टर भी कोन्या
छोरा बोल्या ताऊ कित होया धनस्बा ?
ताऊ बोल्या फेर मन्ने हस्पताल जाना पड़ता आर उड़े मन्ने कोए दाखल नहीं करता तो ?
छोरा दुखी हो लिया जनता लखावे ! एक ने हिम्मत करी पूछ लिया ताऊ के होया कोए बात ना बिचारे का भीड़ में पा पड़ गया होगा माफ़ कर दे ! पा घना जोर तें दब गया के ?
ताऊ बोल्या ना जे दब जाता तो ?

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